बस कंडक्टर मेरा क्रश था, एक दिन बस में ही चुद गई पार्ट 2 - देसी हिंदी सेक्स स्टोरी Hindi Sex Stories
हाय दोस्तों, नेहा फिर से अपनी गंदी कहानी का पार्ट 2 सुना रही हूं। पहली बार बस में राजू भैया के मोटे लंड ने मेरी चूत फाड़ी थी, उसके बाद मैं उनकी रंडी बन गई। अब कॉलेज जाना बंद कर दिया था, रोज बस में चढ़ती सिर्फ उनके लंड के लिए।
पहले कुछ दिन तो बस में ही सब होता। भीड़ में वो मुझे पीछे की सीट पर घसीट ले जाते, सलवार नीचे सरकाते और अपना काला-मोटा लंड मेरी चूत में पूरा घुसा देते।
मैं दांत भींचकर चीख दबाती, लेकिन चूत से रस टपकता रहता। राजू भैया मेरे कान में गंदी बातें करते –
"नेहा रंडी, तेरी चूत कितनी भूखी है... रोज लंड मांगती है। आज फिर पानी निकाल दूंगा तेरी भोसड़ी में।"
मैं शरमाकर उनकी गर्दन में मुंह छुपाती और कहती –
"हां भैया... फाड़ दो मेरी चूत... जोर से पेलो!"
वो और तेज धक्के मारते, भच्च-भच्च की आवाज बस में गूंजती।
एक दिन बस में भीड़ कम थी, लेकिन मोहन भैया (ड्राइवर का दोस्त) भी साथ था। राजू भैया ने कहा –
"आज तेरी दो-दो लंडों से चुदाई होगी, रंडी।"
मैं डर गई लेकिन चूत गीली हो गई। राजू भैया ने मुझे गोद में बिठाया, लंड अंदर डाला। मोहन भैया ने मेरी चुचियां बाहर निकालीं और चूसने लगे। फिर मुंह में अपना लंड ठूंसा। मैं दोनों के बीच फंसी हुई थी – चूत में राजू भैया का लंड, मुंह में मोहन भैया का। दोनों जोर से पेल रहे थे। मैं गले से आवाज निकाल रही थी –
"उम्म... आह्ह... और जोर से... मुझे रंडी बनाओ!"
मैं दो बार झड़ गई, चूत से पानी छलक गया।
राजू भैया बोले –
"अब घर चल, वहां तेरी गांड भी फाड़ेंगे।"
मैं हां में सिर हिलाई। घर पहुंचते ही दोनों ने मुझे नंगा कर दिया। राजू भैया ने मुझे बेड पर घुटनों के बल लिटाया, गांड ऊपर करवाई। वैसलीन लगाई, पहले दो उंगलियां डालीं। मैं कराह रही थी –
"भैया... धीरे... दर्द हो रहा है..."
लेकिन वो बोले –
"रंडी, दर्द सह, मजा आएगा।"
फिर अपना मोटा लंड गांड पर रगड़ा और एक झटके में पूरा घुसा दिया।
"आआह्ह्ह... मर गई!"
मैं चिल्लाई। दर्द इतना था कि आंसू बह गए, लेकिन चूत से रस टपक रहा था।
मोहन भैया नीचे लेट गए, मैं उनके लंड पर चढ़ गई – चूत में उनका लंड। राजू भैया पीछे से गांड में पेल रहे थे। अब मैं दोनों छेदों से चुद रही थी। दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे – भच्च... धच्च... गच्च... मेरी चूत और गांड फट रही थी। मैं चिल्ला रही थी –
"आह्ह... साले हरामी... फाड़ डालो मेरी गांड-चूत... मुझे रंडी बना दो... और जोर से पेलो!"
राजू भैया मेरी गांड पर थप्पड़ मारते –
"ले रंडी, ले पूरा लंड... तेरी गांड अब हमारी है!"
करीब 40 मिनट तक दोनों ने मुझे चोदा। मैं चार-पांच बार झड़ गई, चूत से पानी बह रहा था। आखिर में राजू भैया ने गांड में गर्म वीर्य उड़ेल दिया, मोहन भैया ने चूत में। दोनों का रस मेरे अंदर भर गया।
मैं थककर गिर पड़ी, गांड और चूत दोनों जल रही थीं लेकिन मजा इतना था कि मैं मुस्कुरा रही थी।
उसके बाद से रोज यही होता। बस में कभी-कभार, घर पर घंटों। कभी वो मुझे बाथरूम में ले जाकर शावर के नीचे चोदते – पानी की धार मेरे शरीर पर गिरती, वो पीछे से गांड मारते और कहते –
"नेहा, तेरी गांड अब इतनी ढीली हो गई है... फिर भी टाइट लगती है।"
मैं कहती –
"भैया... रोज मारो... मुझे तुम्हारा लंड चाहिए हर दिन।"
एक दिन पीरियड्स लेट हो गए। मैं डर गई। राजू भैया को बताया। वो बोले –
"चिंता मत कर, टेस्ट करवा लेते हैं।"
टेस्ट पॉजिटिव आया। मैं रोने लगी –
"अब क्या होगा?"
राजू भैया ने मुझे गले लगाया –
"तेरी चूत में हमारा पानी भर गया है... लेकिन चुदाई रुकेगी नहीं। बस अब थोड़ा सावधानी से।"
मोहन भैया ने भी कहा –
"हां रंडी, अब तू हमारी है... मजा जारी रहेगा।"
अब मैं उनके साथ रहती हूं। चुदाई का सिलसिला और तेज हो गया है। रोज दोनों मिलकर मुझे चोदते हैं – कभी बस में, कभी घर पर, कभी तीनों छेदों में लंड। मेरा क्रश अब मेरी पूरी दुनिया बन चुका है।
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नेहा
कहानीकार