हॉस्पिटल में नर्स सोनिया के साथ चुदाई - 19 साल के अमन की पहली मस्त रात
मेरा नाम अमन है। मैं एक मध्यम वर्ग से ताल्लुक रखता हूँ। मैं नोएडा से हूँ।
आज जो किस्सा मैं आपको सुनाऊंगा, वो मेरे साथ अस्पताल में हुआ था। पढ़िए कैसे उस हॉस्पिटल की एक क्यूट नर्स ने मेरे साथ चुदाई करके अपनी गर्मी शांत की और मेरी समस्याएँ दूर कीं।
असल बात ये है कि एक तरह से उसी ने मुझे चोद दिया था। मुझे पैसे की ज़रूरत थी और लॉकडाउन का समय था, इसलिए मजबूरी में मुझे उस अस्पताल में नौकरी करनी पड़ी।
मैंने वहाँ एक हेल्पर के तौर पर काम शुरू किया। मेरे लिए वो माहौल बिल्कुल नया और डरावना था। अस्पताल छोटा था, मगर उन दिनों मरीज़ बहुत ज़्यादा आ रहे थे।
सुरक्षा के हालात को देखते हुए, रात में मुझे और एक सीनियर नर्स को उन मरीज़ों की देखभाल की ज़िम्मेदारी दी गई, जिनकी तबीयत ठीक होने लगी थी।
उस नर्स का असली नाम कोई नहीं जानता था, सब बस उनको सोनिया बोला करते थे। वो 25 की उम्र वाली एक क्यूट लड़की थी। उसका चेहरा भोला-भाला था, हर कोई उसकी बात आसानी से मान लेता था, लेकिन वो स्टाफ के साथ बहुत सख्त रहा करती थी।
मैं नया लड़का था, मेरे आसपास लेडीज़ पेशेंट होतीं तो मुझे काफी शर्म आती थी। तब मैं 19 का था और अंजान औरतों में रहकर शर्माता था।
जब पहली रात मेरी ड्यूटी नर्स सोनिया के साथ लगी, तो हमें एक औरत की ड्रेसिंग चेंज करने के लिए बोला गया। उस लेडी के ऑपरेशन से बच्चा पैदा हुआ था। रात का समय था, सोनिया मुझे लेकर उनके रूम में पहुँची।
ऑपरेशन थिएटर के लड़के उसे कमरे में बेड पर लेटाकर जा चुके थे। उस समय वो औरत बेहोश थी, करीब 30 साल की उम्र होगी उनकी। उसके ऊपर एक चादर डाली हुई थी। सोनिया ने मुझसे बोला,
"ये नंगी है, चादर को अभी नहीं हटाना, इसके ऊपर से जब तक मैं न कहूँ।"
फिर हमने चारों तरफ से पर्दे बंद किए। सोनिया ने मुझे बाहर रखे बॉक्स को लाने के लिए बोला। मैंने उसे बॉक्स लाकर दिया। उसके अंदर से सोनिया ने एक गुलाबी रंग की पैंटी-ब्रा का सेट और एक सैनिटरी पैड निकाला, फिर बॉक्स को फेंक दिया।
उसके बाद सोनिया बोली,
"इसकी कमर से थोड़ा सा चादर हटाओ।"
मैंने हटाकर देखा तो वो एक नीली पैंटी पहने हुई थी। सोनिया ने कहा कि एक तरफ से पकड़कर इसकी पैंटी उतारो, मगर चादर न हटे, मर्यादा का ध्यान रखना।
मैंने पैंटी में ऊपर से उंगली डालकर नीचे खींचने की कोशिश की, लेकिन पैंटी उतरने में परेशान कर रही थी। मैं पहली बार इस तरह किसी की पैंटी उतार रहा था, मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। उसके ऊपर से अलग माहौल डरावना था।
किसी भी समय चीखों की आवाज़ आ जाती थी—किसी के बेटे की कोरोना से जान चली गई, किसी की माँ गुज़र गई। कुछ लाशों को तो रिश्तेदार वहीं छोड़ जाते थे।
मेरी हालत जब सोनिया ने देखी, तो वो बोली, तुम तो लड़कियों से ज़्यादा शर्मा रहे हो। उसने मुझे बाहर भेजकर ब्रा रखकर हॉस्पिटल के बाकी कपड़े लाने को बोला।
मैं जाकर कपड़े लेकर आया। जब तक मैं लौटा, सोनिया ने काम पूरा कर लिया था। उसके बाद एक-एक करके हमने उस औरत को कपड़े पहनाकर कमरे को अच्छे से सेट किया। फिर उसके परिवार से कह दिया कि वो यहां से अपने मरीज़ को संभाल सकते हैं।
सोनिया सच में एक काबिल नर्स थी। उसने मुझे एक नंगी औरत के पास रखा, उसको कपड़े पहनवाए, लेकिन ये सब इतने सलीके से करवाया कि मुझे उसके नंगे जिस्म का एक भी हिस्सा देखने को नहीं मिला।
मुझे खुशी भी थी, क्योंकि भले ही मैं एक लड़का हूँ, लेकिन हर समय तो हवस का गुलाम नहीं बनना चाहूँगा। सोनिया इंसानी फितरत व समय की ज़रूरत को अच्छे से संभालना जानती थी।
हमारी ड्यूटी सुबह 8 बजे खत्म हुई। थकान से हम दोनों की हालत बुरी हो गई थी। मेरे मुकाबले सोनिया फिर भी फुर्तीली थी। उसने मुझसे बोला,
"8:30 तक सब आने लगेंगे। जाओ चाय बनाओ, तब तक मैं कपड़े बदल लेती हूँ। अगर हम 9 बजे तक नहीं निकले, तो फिर दिन में भी ड्यूटी करनी पड़ जाएगी।"
मैंने उससे कोई सवाल नहीं किया, बस जल्दी से चाय बनाने गया। जब मैं चाय लेकर वापस आया, तो उसके रात के कपड़े बाहर पड़े थे। दो पर्दों के पीछे वो अपने कपड़े बदल रही थी।
लेकिन किनारे पर एक शीशा लगा था, जिसमें से मुझे सब कुछ साफ नज़र आ रहा था। नर्स सोनिया दूध सी गोरी थी, एक दम मखमल जैसा जिस्म। चूंचे छोटे थे, मगर उनपर भूरे निप्पल बड़े-बड़े थे। गांड़ का उभार 28 का साइज़ बता रहा था, चूंचे शायद 32 के होंगे। कमर एक दम पतली 24 की।
नर्स सोनिया काम के समय ऐसी बिलकुल नहीं लगती थी, मगर कपड़े उतारते ही, उनके ऊपर नई चढ़ती जवानी की चमक साफ दिख रही थी।
मैंने अपने सूखे होठों को ज़बान फेर कर गीला किया। सोनिया की चूत पर मुझे बालों का गुच्छा दिखा, ऐसा लग रहा था जैसे फ्रेंच फिल्म देख रहा हूँ। उनके काले बालों का जुड़ा, हल्के गुलाबी पतले होठ, नादान सी छोटी आँखें व नाक बता रही थी कि फल अभी पके नहीं हैं।
एक-एक करके सोनिया ने कपड़े पहनने शुरू किए। पहले उन्होंने काली सी एक ब्रा पहनी। मेरे मन में सवाल आया कि उनको आखिर ब्रा की ज़रूरत क्या है, लेकिन निप्पल बड़े थे तो उनको छुपाना फिर भी ज़रूरी है। फिर उन्होंने एक काली पैंटी पहनी। उसके बाद एक नीली कुर्ती पहनी जो उनके घुटने तक आ रही थी।
जब वो बाहर चाय पीने आई, तो बिल्कुल कॉलेज की प्यारी सी लड़की लग रही थी। ये वही लड़की थी जिसने रात मुझे इतनी समझदारी से सारा काम कराया कि मैं उसका फैन हो गया। नर्स सोनिया अपनी नाक में एक छोटी रिंग पहनती थी, जो उनके गोरे रंग को अधिक निखार देती थी।
चाय पीते-पीते हमने समय देखा तो 8:30 हो गए थे। बाकी स्टाफ भी आने लगा था। उन दिनों हाल-चाल पूछने का भी हमें समय नहीं मिल रहा था। उन्होंने मुझसे बोला कि
"जल्दी यहां से निकलो, अगर डॉक्टर आ गए तो जाने नहीं देंगे।"
मैंने अपना सामान लिया और हम दोनों साथ ही निकल गए। मेरे पास गाड़ी थी, तो उन्होंने मुझे कहा कि मैं उनको घर छोड़ दूँ। मुझे भी कोई दिक्कत नहीं थी। उनको घर पर छोड़ते हुए वो बोली,
"शाम को समय से आ जाना अमन।"
फिर मुझे छेड़ने के अंदाज़ में मुस्कुराकर वो चल दी।
मैं घर जाकर सो गया। बहुत ज़्यादा थकान हुई थी मुझे। सपने में दोबारा मैंने उसी पल को जी लिया जब नर्स सोनिया मेरे सामने नंगी थी।
रात को जब वापस हॉस्पिटल पहुँचा, तो सब कुछ पिछले दिन जैसा ही हो रहा था, मगर फर्क इतना था कि आज काम कम था। हमारी ड्यूटी शुरू हो चुकी थी, लेकिन सब मरीज़ सोए हुए थे। कोई नया मरीज़ भी नहीं आया था।
एक कमरा स्टाफ के लिए खाली होता था, जब तक कोई घंटी न बजे हम उधर बैठ सकते थे। मैं उसी कमरे की तरफ जाने लगा। मेरी नज़र सोनिया पर पड़ी, वो शीशे को घूर रही थी। मेरी आहट से वो पलटी। उन्होंने मुझे शक भरी निगाहों से देखा और देखते-देखते उसी कमरे में चली गई।
मैं अंदर गया। मैंने अपना मोबाइल निकाला, उसमें कामवासना पर सेक्स वीडियो देखने लगा। मुझे सोनिया की आवाज़ आई,
"ले लिया हसीन नज़ारा।"
उसकी बात सुनकर मेरे हाथ से फोन बस गिरने वाला था। मैं हिचकता हुआ बोला,
"क्या जी?"
मैंने उनका चेहरा देखा तो वो अपने होठ काटते हुए मुझे घूर रही थी। फिर उसने "कुछ नहीं" बोलकर नज़र घुमाई।
मैं नजरें नीचे करके अपनी देसी सेक्स वीडियो देखने पर फोकस करने लगा, मगर अब मेरा ध्यान बार-बार सोनिया पर जा रहा था। उसकी हॉस्पिटल स्कर्ट घुटनों तक थी, एक सफेद कोट में बैठी वो अपने पैर हिला रही थी।
उसने मुझसे अपने बराबर में बेड पर बैठने को कहा। मैं घबराते हुए बैठा। उसकी आँखों में एक गुस्सा था, मगर चेहरा क्यूट होने के कारण मैं खुद को उसकी बातें मानने से रोक नहीं पाया।
मेरी टांग पर हाथ रखती हुई वो बोली,
"नज़ारा कैसा लगा?"
मैंने गले में अटका हुआ पानी निगला और अंजान बनने की कोशिश करने लगा। मैंने कह दिया कौन सा नज़ारा?
वो थोड़ा चिड़ी, फिर कहने लगी,
"तुमको सच में नहीं मालूम कि सुबह तुम्हारी चाय ज़मीन पर क्यों गिर गई थी?"
मेरा दिमाग हिल गया। सोनिया ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी जांघ पर रख दिया। उफ्फ! कितनी मुलायम थी नर्स सोनिया।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ। फिर वो उठी और कमरे का दरवाज़ा बंद करके मेरे पास आने लगी। उसने अपना कोट निकालकर मेरे ऊपर फेंका और कहने लगी,
"अमन, आज मैं तुम्हारी शर्म निकालती हूँ।"
सुबह जो मैंने नज़ारा देखा था, उसके बाद से मैं खुद उनको चोदना चाहता था, मगर ये सब इस तरह और इतना जल्दी होगा, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।
नर्स सोनिया ने मेरे मुँह पर से कोट हटाया, फिर अपनी दोनों टाँगें खोलकर मेरे ऊपर बैठ गई। उन्होंने मुझे पीछे धकेला, फिर मेरे ऊपर लेटती हुई अपने होठों को मेरे होठों से चिपका दिया।
मैंने तब घुटने मोड़ रखे थे। नर्स सोनिया ने मेरी टाँगें सीधी कीं और मेरे हाथों को पकड़कर अपनी पीठ पर ले गई। उनकी नाक पर बैठी रिंग मेरे होठों पर चुभ रही थी, मगर ये दर्द उस आरामदायक गर्मी के सामने फीका था जो सोनिया के जिस्म से मुझे मिल रही थी।
वो पहली बार था जब कोई लड़की मेरे ऊपर चढ़कर मुझे चोद रही थी। सोनिया ने पहले मेरे ऊपर के होठ को चूसा, फिर मेरे नीचे के होठ को चूमा। मैंने उनके मुँह में अपनी ज़बान दी, उनके पतले-पतले होठ मेरे होठों में एक साथ आ गए।
मेरे होठ हमेशा से थोड़े मोटे रहे हैं। पहले मुझे ये बात बुरी लगती थी, लेकिन जब से लड़कियों ने मेरी किसिंग की तारीफ की है, तबसे मुझे अपने होठ अच्छे लगने लगे। आज तक जितने भी होठों ने मेरे होठ चूमे हैं, सबका यही कहना है कि मोटे होठों को चूसने में बहुत मज़ा आता है।
नर्स सोनिया को शायद वही मज़ा मिल रहा होगा। वो मेरे होठों को छोड़ने को तैयार नहीं थी। मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी, मगर वो हटने को तैयार नहीं थी। फिर मुझे भी मन नहीं किया कि मैं उनको हटाऊँ।
मैंने अपने हाथ से उनकी प्यारी सी गांड को सहलाना शुरू कर दिया। मैं उनकी गांड के बीच की गहराई को कपड़ों के ऊपर से ही अपनी उंगलियों से सहला रहा था। अंदाज़न पंद्रह मिनट हमने एक-दूसरे के होठ चूसे। हमारे मुँह का रस एक हो चुका था।
मैंने आगे बढ़ते हुए उनके कपड़े उतारने शुरू किए। वो भी एक-एक करके मेरे कपड़े उतारने लगी। उन्होंने अपनी ब्रा उतारते ही मेरे मुँह से अपने नुकीले निप्पल रगड़ना चालू कर दिया। मैंने भी उनकी चूंची को चूमना और निप्पल को चूसना शुरू कर दिया।
"आआह! हमममम! बहुत अच्छे अमन! मम्मम्! यूऊफ़। आआह! हमममम! तुम जल्दी सीख लेते हो।"
कहते हुए वो अपनी आवाज़ को कमरे के बाहर जाने से रोकने की कोशिश कर रही थी। मेरा पूरा ध्यान उनके छोटी चूंची के बड़े निप्पल पीने में था। मैंने उनको पलटना चाहा, मगर वो नहीं पलटी। वो बोली,
"मुझे वो लोग पसंद नहीं जो मुझे अपने नीचे लाना चाहते हैं।"
मैंने कोई जवाब नहीं दिया और अपने हथियार उनके आगे डाल दिए। नर्स सोनिया का चुदाई का तजुर्बा उनकी कारस्तानियाँ बता रहा थीं। उन्होंने अपनी पैंटी में छुपी चूत मेरे लंड पर रगड़नी शुरू कर दी।
मुझे उठाकर वो मेरे कंधे पर हाथ रखने लगी और थोड़ा पीछे गिरकर लंड को चूत से घिसने लगी। इससे मेरा 7 इंच का लंड तनकर तैयार हो गया।
फिर वो बेड पर खड़ी हुई। मैंने उनकी पैंटी नीचे कर दी। नर्स सोनिया की बालों से भरी गोरी चूत मेरे मुँह के बिल्कुल सामने थी। मेरा उसे चाटने का बिल्कुल मन नहीं था। मैं दिल में सोचने लगा कहीं ये चूत चाटने को न बोल दे। अगर वो बोलती तो इस समय मुझे उनकी बात माननी पड़ती, क्योंकि पापी लंड का सवाल था।
मैंने उन्हें देखा। सोनिया ने मेरी आँखें पढ़ लीं। उन्होंने अपनी तीन उंगलियाँ अपने मुँह में लेकर चूसीं, फिर मेरे चेहरे पर अपने मुँह का रस लगाकर मुस्कुराई और मेरे लंड को आज़ाद करने का इशारा देते हुए नीचे बैठने लगी।
मैंने जल्दी-जल्दी उनके बैठने से पहले अपना लंड निकाला। वो एकदम सख्त होकर खड़ा हुआ था। वो बिना रुके धीरे-धीरे बैठने लगी। उनके चेहरे पर शैतानी मुस्कान थी।
उनकी चूत मेरे लंड को छूने वाली थी। मैं लंड को पकड़े तैयार बैठा था। वो सीधा अपनी चूत को मेरे लंड पर बैठाती चली गई। थोड़ा-थोड़ा करके पूरा लंड एक बार में चूत में समा गया।
उन्होंने मेरे गाल पकड़कर जोर से चूमा, फिर बोली,
"शाबाश।"
अपने होठों को मेरे होठों से मिलाकर नर्स सोनिया ने लंड के ऊपर कूदना शुरू कर दिया। "ऊंह! अआआह! फुफ्फु! हमममम! यूपयूफ!" की धीमी आवाज़ उनके मुँह से निकलने लगी। वो मेरे लंड के ऊपर उछलती जा रही थी, मगर होठों को चूमने नहीं दे रही थी। वो बस होठों को मेरे साथ रगड़ती जाती और चुदाई करती जाती।
"हाअह! आगाह! Yes अमन! ओह अमन शाबाश अमन! हमममम! ओहद्ह! अआआह! हमममम!"
करते-करते वो झड़कर शांत हो गई। वो मेरे कंधे पर गिरी और अपनी हाँफती साँसों को संभालने लगी। मेरा लंड अभी भी खड़ा था। वो उठी, मेरी आँखें अपनी आँखों से मिलाकर बोली,
"परेशान मत हो अमन, मैं तुमको बेचैन नहीं छोड़ूँगी।"
वो मेरे लंड पर से उठी, फिर मुझे पीछे धकेलकर लंड को चूसने लगी। आआह! वो लंड को चूसते हुए दाँतों से धीरे-धीरे काटती। मेरी जितनी आह! निकलती, उनको उतना मज़ा आता।
वो अपनी चूत के रस को मेरे लंड से पूरी तरह साफ कर गई। समय ज़्यादा होने लगा, करीब आधे घंटे से हम चुदाई कर रहे थे। इसलिए उन्होंने खूब तेज़ी से लंड चूसना शुरू किया।
"आगाह! ओह! सोनिया मैम। हमममम!"
मैं उनके बाल सहला रहा था कि तभी मेरा पानी उनके मुँह में निकल गया। मैंने उनके बाल पकड़कर अपने लंड पर दबा दिया। वो हटने की कोशिश करती रह गई और मैंने उनके गले के अंदर तक लंड की पिचकारी मारी।
जब मैंने उनको छोड़ा, तो उन्होंने गुस्से से मुझे देखा। उनका चेहरा बहुत क्यूट था तो मुझे डर नहीं लगा। उन्होंने एक जोर का थप्पड़ मेरी गांड पर मारा, जिससे मेरी आह! निकल गई। उनकी सेहत से मुझे लगा नहीं था कि वो इतनी जोर से मार सकती हैं।
फिर हमने कपड़े ठीक किए। उन्होंने मेरा मुँह पकड़ा और कहा,
"इस बारे में अगर किसी को पता चला तो अच्छा नहीं होगा!"
वो इधर-उधर देखी और अचानक मेरे होठों से होठ मिला दिए। नर्स सोनिया ने मेरे होठों पर काटा, वो भी ऐसे कि खून निकल आया। वो ये बोलती हुई कमरे से निकल गई कि
"मुझे हर जगह अपनी मोहर छोड़ना पसंद है।"
ये थी मेरी Hindi Sex Stories।
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