प्रिया आंटी के साथ और रातें – राहुल की गर्म चुदाई की कहानी
दोस्तो, पिछली स्टोरी में मैंने तुम्हें बताया था कि कैसे प्रिया आंटी ने मुझे अपना गुलाम बनाया, उनकी चूत चटवाई, मूत पिलाया और फिर गांड तक चुदवाई। वो रात मेरी जिंदगी की सबसे गर्म रात थी, लेकिन क्या तुम्हें पता है कि वो सिर्फ शुरुआत थी?
आंटी की भूख इतनी थी कि अगली रातें और भी पागलपन भरी हो गईं। आज मैं तुम्हें वो सारी चुदाई की कहानियां सुनाता हूं – राहुल के साथ प्रिया आंटी की और रातें, जहां लंड और चूत का खेल कभी रुका नहीं। ये स्टोरी पढ़कर तुम्हारा लंड पानी छोड़ देगा और लड़कियां अपनी चूत में उंगली डालकर सोचेंगी कि काश कोई ऐसा राहुल मिले। चलो, शुरू से बताता हूं, वो अगली सुबह से।
सुबह उठा तो आंटी किचन में थीं, साड़ी में इतनी हॉट लग रही थीं कि मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। उन्होंने मुझे देखा और मुस्कुराईं,
"राहुल बेटा, रात अच्छी गुजरी? अगर अंकल आज भी लेट आए, तो और मजा आएगा।"
मैंने हां में सिर हिलाया और कॉलेज चला गया। पूरे दिन एग्जाम में बैठा रहा, लेकिन दिमाग में सिर्फ आंटी की चूत का स्वाद था – वो नमकीन रस, शहद की मिठास, और उनका गर्म मूत।
शाम को घर लौटा तो आंटी ने फोन पर अंकल से बात की,
"हां जी, आज भी लेट? ठीक है, हम सो जाएंगे।"
फोन रखते ही आंटी ने मुझे आंख मारी और बोलीं,
"आज तुझे स्पेशल गिफ्ट मिलेगा, लेकिन पहले खाना खा।"
खाना खाकर हम टीवी देखने लगे। 11 बज गए, अंकल नहीं आए। आंटी उठीं और बाथरूम चली गईं। मैं इंतजार करता रहा। बाहर आईं तो सिर्फ एक पारदर्शी नाइटी में – अंदर कुछ नहीं। उनके बूब्स साफ दिख रहे थे, निप्पल खड़े, और चूत की लाइन नजर आ रही थी।
बोलीं,
"चल राहुल, आज तुझे सिखाती हूं असली खेल।"
मुझे हाथ पकड़कर रूम में ले गईं। बेड पर धक्का देकर गिराया और मेरे ऊपर चढ़ गईं।
"कल तूने अच्छा काम किया, आज तू मेरी रांड बन।"
मैंने कहा,
"आंटी, जो कहो।"
उन्होंने मेरी शर्ट उतारी, पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। लंड देखकर बोलीं,
"वाह, इतना मोटा हो गया। कल की चुदाई से ताकत आ गई।"
मुंह में ले लिया और चूसने लगीं – जीभ से चाटतीं, दांतों से हल्का काटतीं, और हाथ से मसलतीं।
मैं पागल हो रहा था,
"आंटी उफ्फ... आंह..."
वो हंसकर बोलीं,
"चुप साले, आज तू चिल्लाएगा।"
लंड चूसकर खड़ा कर दिया, फिर अपनी नाइटी उतारी। पूरी नंगी हो गईं – उनके तरबूज जैसे बूब्स लटक रहे थे, गांड गोल-मटोल, चूत गुलाबी और गीली।
बोलीं,
"आज तुझे मेरी गांड का राज बताती हूं।"
मुझे नीचे लेटाया और 69 पोजिशन में आ गईं – उनकी चूत मेरे मुंह पर, मेरा लंड उनके मुंह में। मैं चूत चाटने लगा, जीभ अंदर डाली, रस चूसा। आंटी बोलीं,
"चाट साले, आज शहद नहीं, मेरी क्रीम खा।"
वो मेरे लंड को गले तक ले रही थीं, ग्लक-ग्लक की आवाज आ रही थी। कुछ देर बाद उन्होंने चूत से पानी छोड़ा – सारा मेरे मुंह में। मैं पी गया, नमकीन लेकिन मस्त।
फिर आंटी उठीं और बोलीं,
"अब गांड मार।"
लेकिन इस बार वो कुतिया स्टाइल में झुकीं। मैंने लंड पर थूक लगाया, गांड के छेद पर रगड़ा। आंटी बोलीं,
"धीरे साले, कल सुजा दी थी।"
मैंने धक्का मारा, आधा लंड अंदर। आंटी चिल्लाई,
"आंह मादरचोद... फाड़ दे।"
मैंने पूरा घुसा दिया और धक्के मारने लगा – जोर-जोर से, उनके बूब्स पकड़कर। आंटी गांड हिलाकर साथ दे रही थीं,
"चोद साले, तेरे अंकल कभी गांड नहीं मारते।"
दस मिनट चुदाई के बाद मेरा पानी निकला, सारा गांड में गिरा दिया। आंटी थरथरा उठीं, बोलीं,
"वाह राहुल, तू तो स्टड है।"
लेकिन रुकना कहां था? आंटी ने मुझे बाथरूम ले जाकर शावर ऑन किया। पानी के नीचे हम नंगे खड़े, वो मेरे लंड को साबुन लगाकर धो रही थीं।
बोलीं,
"अब तुझे मूत का मजा फिर से।"
मैं घुटनों पर बैठा, आंटी ने चूत खोली और गर्म धार मुंह में मारी। मैं पीता रहा, इस बार मजा आ रहा था। फिर उन्होंने मुझे दीवार से सटाया और चूत में लंड घुसा लिया – स्टैंडिंग पोजिशन में चुदाई। पानी गिर रहा था, धक्के की आवाज गूंज रही थी। आंटी बोलीं,
"फाड़ दे साले, मेरी चूत तेरी है।"
मैंने स्पीड बढ़ाई, उनके निप्पल चूसे, और पानी निकाला चूत में। हम दोनों हांफते हुए सो गए।
अगली रात अंकल फिर लेट। आंटी ने प्लान बनाया –
"आज आउटडोर मजा।"
रात 12 बजे हम छत पर गए। चांदनी रात, ठंडी हवा। आंटी ने साड़ी उतारी, नंगी हो गईं।
बोलीं,
"यहां चोद, कोई देखेगा तो मजा आएगा।"
मैं डर गया, लेकिन लंड खड़ा। मैंने उन्हें घास पर लेटाया, चूत चाटी – हवा से और गर्म। फिर लंड घुसाया, मिशनरी स्टाइल। आंटी सिसकारियां ले रही थीं,
"आंह राहुल... जोर से।"
मैं धक्के मारता रहा, उनके बूब्स मसलता। अचानक पड़ोस की लाइट जली, हम छुप गए लेकिन चुदाई जारी। मेरा पानी निकला, आंटी ने मुंह में लिया। नीचे आकर फिर बेड पर – इस बार आंटी ऊपर, काउगर्ल स्टाइल। वो उछल-उछलकर चुदवा रही थीं,
"देख साले, तेरी रांड हूं मैं।"
आधा घंटा चला, दोनों झड़ गए।
दो दिन बाद अंकल घर पर थे, लेकिन आंटी ने चाल चली। अंकल सो गए, आंटी चुपके से मेरे रूम में आईं।
"चुप रह, क्विकी।"
मैंने पैंट उतारी, आंटी ने चूत में लंड लिया – दीवार से सटाकर। धक्के मारे, मुंह बंद रखा। आंटी बोलीं,
"जल्दी साले, पानी गिरा।"
पांच मिनट में काम तमाम। अगली सुबह किचन में – आंटी खाना बना रही थीं, मैं पीछे से चिपक गया। साड़ी ऊपर की, लंड घुसाया। आंटी बोलीं,
"राहुल, कोई आ जाएगा।"
लेकिन गांड हिलाने लगीं। स्टैंडिंग डॉगी, जल्दी-जल्दी चोदा, पानी चूत में।
एक रात आंटी ने सरप्राइज दिया – उनके पुराने डॉक्टर फ्रेंड को बुलाया।
"राहुल, आज थ्रीसम।"
मैं शॉक, लेकिन एक्साइटेड। डॉक्टर आया, आंटी ने हमें नंगा किया। आंटी बीच में, मैं चूत चाटता, डॉक्टर गांड। फिर चेंज – मैं गांड मारता, डॉक्टर चूत। आंटी चिल्ला रही थीं,
"दोनों साले, फाड़ दो।"
डबल पेनिट्रेशन, आंटी का पानी फुहार मारकर निकला। हम दोनों ने उनका मुंह भरा। वो रात तीन घंटे चली, सब थककर सोए।
फिर एक दिन आंटी ने कहा,
"राहुल, तेरे दोस्त को बुला।"
मैंने अपना बेस्ट फ्रेंड अमित को बताया, वो आया। आंटी ने हमें रूम में बंद किया।
"तुम दोनों मुझे चोदो।"
अमित शर्मा गया, लेकिन आंटी ने उसका लंड चूसा। मैं पीछे से चूत में, अमित मुंह में। फिर चेंज – अमित चूत, मैं गांड। आंटी बोलीं,
"दो जवान लंड, उफ्फ..."
हमने घंटों चोदा, आंटी ने हमारा पानी पिया। अमित बोला,
"भाई, तेरी आंटी रांड है।"
मैं हंसा।
ऐसे ही दिन बीतते गए। एक बार कार में – आंटी ड्राइव कर रही थीं, मैंने सीट नीचे की, चूत चाटी। रोड पर चुदाई, खतरा लेकिन मजा। घर में हर कोने – सोफे पर, टेबल पर, यहां तक कि बालकनी में। आंटी की फैंटसी पूरी – मूत पिलाना, गालियां, चॉकलेट से खेल। मेरी 12वीं खत्म हुई, घरवाले लौटे, लेकिन हम चुपके मिलते रहे। आंटी अब मेरी मालकिन थीं।
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राहुल
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