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चचा के मोटे लंड ने मेरी चूत-गांड दोनों फाड़ दी!

by रिया20 नवंबर 20248 मिनट0 views0 Comments

मेरा नाम रिया है। अब मैं बताती हूं कि कैसे मैं चचा असलम के मोटे लौड़े के संपर्क में आई।

जब मैं 18+ की हुई, तो पूरी तरह जवान हो चुकी थी – चुचियां फूली हुई, गांड गोल-मटोल, चूत हमेशा गीली रहती। सेक्स का मन करने लगा था। कॉलेज की लड़कियां रोज सुबह कैम्पस के कोने में खड़ी होकर लंड-चूत-भोसड़ी की बातें करतीं – कौन कितना बड़ा लंड चूसता है, कितनी देर चुदाई करता है, गांड मारने का मजा... सब सुन-सुनकर मेरी झांटें सुलग जातीं। मन करता – यार, मैं क्यों अभी तक वर्जिन हूं? सब लंड पकड़ चुकी हैं, चूस चुकी हैं, सिर्फ मैं ही बहनचोद चूतिया हूं!

एक दिन सहेली से बोली –

"यार, कोई लंड पकड़ा के दे ना प्लीज!"

उसने तरस खाकर अपने भाई का लंड पकड़ा दिया। मुझे सिखाया – कैसे पकड़ना, कैसे चाटना, कैसे चूसना, मुठ मारना, लंड का रस पीना। मैंने पहली बार लंड मुंह में लिया तो स्वाद... उफ्फ!

मैं अपनी मौसी से काफी खुली थी। एक दिन बोली –

"मौसी, मैंने अभी तक कोई लंड नहीं पकड़ा!"

वो हंसकर बोली –

"अरे रिया, तू भोसड़ी वाली इतने दिन क्या गांड मरवा रही थी? इतनी मस्त जवान हो गई और लंड नहीं चूसा? तेरी मां का भोसड़ा... आज मैं तुझे लंड पकड़ाती हूं!"

मौसी ने फोन कर अपने देवर (चचा असलम) को बुलाया। बोली –

"रिया, अब इसके पजामा खोल और लंड पकड़। प्यार से हिला-हिला के देख!"

मैं शरमाई, लेकिन बदन में आग लग गई। पजामा खोला तो लंड... वाह! सहेली के भाई से दोगुना मोटा, लंबा, नसें फूली हुईं!

मौसी ने मेरे कपड़े उतारे, मुझे पूरी नंगी कर दिया। बोली –

"नंगी होकर लंड चूसने का मजा अलग है बेटी!"

वो खुद भी नंगी हो गईं, दोनों मिलकर चचा का लंड चाटने लगे। फिर चचा ने मुझे लिटाया और अपना मोटा लंड मेरी चूत में पेल दिया। पहली चुदाई... दर्द के साथ मजा! मैं चिल्लाई –

"आह्ह्ह... चचा... फाड़ दो मेरी चूत!"

उसी दिन मौसी से सीखा – कैसे गांड उठाकर चुदवाना, कैसे चूत कसकर पकड़ना। फिर तो मेरी गाड़ी चल पड़ी।

कुछ दिन बाद रात को पता चला घर में कुछ चल रहा है। रात 12 बजे उठी, मम्मी के कमरे की लाइट धीमी थी। खिड़की से झांका तो... वाह! मम्मी पूरी नंगी, चचा असलम का लंड चूस रही थीं। मम्मी के बड़े-बड़े दूध हिल रहे, भोसड़ा खुला हुआ। चचा का लंड देखकर मेरी चूत तर हो गई –

"बहनचोद... क्या मस्त लौड़ा है! घर में ही इतना बड़ा लंड!"

मैंने फोटो-वीडियो बना लिए। मन हुआ अंदर जाकर लंड पकड़ लूं और मुंह में डाल दूं। चचा ने मम्मी की चूत में घुसाया तो मैं मन ही मन बोली –

"अब मम्मी मुझे लंड चूसने से कैसे मना करेगी? खुद तो बड़ी चुदक्कड़ है!"

उस दिन से चचा का लंड दिमाग में घूमने लगा।

एक दिन मौका देखकर चचा के घर गई। वो बोला –

"अरे रिया, सही टाइम पर आई! बिरयानी मंगाई है, दोनों मिलकर खाएंगे, घर में कोई नहीं।"

मैं सटकर बैठी, बातों-बातों में लंड पर हाथ रख दिया –

"चचा, तेरा लौड़ा आजकल बड़ा हरामी हो रहा है ना?"

नाड़ा खोला, पजामा उतारा, लंड पकड़कर हिलाने लगी। वो बोला –

"रिया, तू तो बहुत बेशर्म हो गई!"

मैं बोली –

"बेशर्म तो तू है मादरचोद... मम्मी के भोसड़े में लंड पेलता है, तब शर्म नहीं आती?"

वो चौंका –

"मतलब तूने देख लिया?"

"हां, लंड भी देखा, मम्मी का भोसड़ा भी!"

फिर मैंने लंड मुंह में डाल दिया। चूसा इतना कि मुंह में ही झड़ गया – पूरा रस पी गई। बोली –

"अब मुझे चोद... जैसे मम्मी को चोदता है!"

पर तभी कोई आ गया, मैं भागी।

अगले दिन फोन किया –

"अकेले हो?"

"हां रिया, आज कोई नहीं आएगा।"

10 मिनट में पहुंच गई, लिपट गई। वो बोला –

"रिया, मैं तुझसे प्यार करता हूं... कल तूने लंड चूसा तो रात भर सोचता रहा!"

चुचियां दबाईं, मैंने लुंगी खोलकर लंड पकड़ा –

"साला पहले से खड़ा है!"

दोनों नंगे हो गए। वो बोला –

"हाय रब्बा... कितनी हॉट है तू! मेरे दोस्त की नई बीवी भी तेरी तरह नहीं!"

मैंने पूछा –

"उसे चोदा?"

"हां, दोस्त को गांड मारने का शौक है, चूत नहीं। तो वो मुझे अपनी बीवी चुदवाता है – उसके सामने चूत में लंड पेलता हूं!"

ये सुनकर मैं और गर्म हो गई –

"अब मुझे चोद... चूत में पेल!"

69 बनाया – मैं लंड चूस रही, वो मेरी चूत चाट रहा। फिर मैं घुटनों के बल लेटी, गांड ऊपर, लंड मुंह में घुसाया। अचानक पीछे से किसी ने गांड में लंड पेल दिया! चिल्लाई –

"कौन मादरचोद?!"

चचा बोला –

"ये मेरा दोस्त मुनीर है... गांड मारने का शौक है। तेरी गांड देखकर पेल दिया!"

मुझे मजा आने लगा –

"अच्छा... तो मार अच्छे से! आज चूत और गांड दोनों फाड़वाऊंगी!"

चचा के लंड पर चढ़ी – चूत में पूरा घुसा। मुनीर ने गांड में पेला – दोनों लंड एक साथ! भच्च-भच्च... धच्च-धच्च! मैं चिल्लाई –

"फाड़ डालो मेरी चूत-गांड साले हरामियों! जैसे मम्मी को चोदते हो, मुझे रंडी बनाकर चोदो!"

फिर पोजिशन बदली – मुनीर नीचे, मैं उसके लंड पर गांड में बैठी, चूत खुली। चचा ने चूत में पेला। दोनों ने मिलकर इतना चोदा कि चूत से पानी छूट गया, मैं झड़ी! फिर मुनीर झड़ा, चचा मुंह में झड़ा – दोनों का रस चाटा।

लेकिन मजा यहीं नहीं रुका... अचानक मौसी की बेटी, फूफी और उनकी ननद कमरे में आ गईं! आंखें फाड़कर देखने लगीं। मेरा जोश दोगुना –

"देखो सब... मैं कितनी मस्त चुद रही हूं!"

वे भी कपड़े उतारकर शामिल हो गईं – अब फुल family orgy! सबने मिलकर मुझे चोदा, मैंने सबके लंड-चूत चाटे। रात भर चुदाई चली – चूत, गांड, मुंह सब फाड़ दिए।

अब मैं पूरी रंडी बन चुकी हूं – चचा का लंड रोज चाहिए, और परिवार का secret ab open party ban gaya!

#देसी#Hindi Sex Story#चचा#रिया#फैमिली

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