कॉलेज दोस्तों के साथ हॉस्टल रूम में ग्रुप चुदाई Hindi Sex Stories
हाय दोस्तों, मैं प्रिया हूं। उम्र 20 साल, दिल्ली के एक प्राइवेट कॉलेज में बी.कॉम फाइनल ईयर। फिगर 34-26-36, गोरी स्किन, लंबे बाल और टाइट कपड़े पहनने की आदत। मेरे टाइट टॉप और शॉर्ट्स कॉलेज में सबका ध्यान खींचते हैं, लड़के मेरे पीछे पागल रहते हैं, लेकिन मैं हमेशा थोड़ी शर्मीली बनी रहती हूं। मेरे चार सबसे क्लोज दोस्त हैं – अक्षय, रोहन, विक्रम और सिद्धार्थ। सब मेरे ही बैच के, हॉस्टल में अलग-अलग रूम लेकिन शाम को अक्सर किसी न किसी के रूम में जमा हो जाते हैं। फिल्म देखते हैं, गप्पें मारते हैं, कभी-कभी शराब भी पीते हैं।
एक रात करीब 10 बजे सिद्धार्थ के रूम में हम सब जमा थे। बाहर बारिश हो रही थी। हमने बीयर की कैन खोलीं। मैंने भी एक ली – नशा चढ़ने लगा। अक्षय ने मजाक में कहा –
"प्रिया, तू आज इतनी हॉट लग रही है, टाइट टॉप में तेरी चुचियां बाहर आने को तैयार हैं।"
सब हंस पड़े। मैंने भी हंसकर कहा –
"अरे, तुम लोग तो रोज घूरते हो, आज बोल रहे हो?"
रोहन बोला –
"भाई, आज ट्रुथ या डेयर खेलें?"
सबने हां कर दी।
खेल शुरू हुआ। पहले कुछ राउंड मजाक-मस्ती चली। फिर विक्रम का नंबर आया। उसने डेयर चुना। सिद्धार्थ बोला –
"प्रिया के टॉप के ऊपर से चुचियां दबा 10 सेकंड तक।"
सब हंस पड़े। मैं शरमा गई लेकिन नशे में बोली –
"ठीक है, लेकिन सिर्फ 10 सेकंड।"
विक्रम मेरे पास आया। उसने धीरे से मेरे टॉप के ऊपर से मेरी चुचियां पकड़ीं और दबाने लगा। मैं सिहर गई –
"आह्ह... बस करो..."
लेकिन अंदर से मजा आने लगा। 10 सेकंड बीत गए, विक्रम ने हाथ नहीं हटाया। मैंने कहा –
"बस करो यार!"
फिर अक्षय का नंबर आया। उसने डेयर चुना। रोहन बोला –
"प्रिया का टॉप उतार और चुचियां चूस 30 सेकंड तक।"
कमरे में सन्नाटा छा गया। मैंने कहा –
"नहीं यार... ये ज्यादा हो रहा है।"
सब चिल्लाने लगे –
"डेयर है डेयर!"
नशे में मैंने हां कर दी। अक्षय मेरे पास आया। उसने मेरा टॉप ऊपर किया, ब्रा नीचे की। मेरे निप्पल सख्त हो गए। अक्षय ने एक चुचा मुंह में लिया और चूसने लगा। मैं सिसकार रही थी –
"आह्ह... अक्षय... धीरे..."
वो दूसरे को हाथ से मसल रहा था। 30 सेकंड बीत गए, वो रुका नहीं। मेरी चूत गीली हो गई थी।
अब मेरी बारी। मैंने डेयर चुना। सिद्धार्थ बोला –
"चारों के लंड बाहर निकाल और एक-एक करके चूस।"
कमरा गर्म हो गया। मैंने कहा –
"नहीं यार... ये तो बहुत..."
सबने जिद की। मैंने नशे में हां कर दी। चारों ने पैंट नीचे की। चार लंड मेरे सामने तने हुए थे। मैंने पहले अक्षय का लिया। मुंह में डाला, जीभ से चाटा। वो कराहा –
"प्रिया... कमाल कर रही है..."
फिर रोहन का। गले तक ले गई। विक्रम का चूसा, सिद्धार्थ का भी। मैं घुटनों पर थी, मुंह में एक-एक करके ले रही थी। सब कराह रहे थे। मेरी चूत से रस टपक रहा था।
फिर सब मुझे बेड पर लिटाया। रोहन ने मेरी स्कर्ट उतारी, पैंटी नीचे की। अक्षय मेरी चूत चाटने लगा। सिद्धार्थ मेरे मुंह में लंड डाल रहा था। विक्रम मेरे चुचे चूस रहा था। मैं सिसकार रही थी –
"आह्ह... सब... और जोर से..."
अक्षय ने जीभ अंदर डाली, क्लिट चूसा। मैं झड़ गई – पानी उसके मुंह पर छलक गया।
फिर रोहन ने लंड मेरी चूत में घुसाया।
"आह्ह... रोहन... कितना मोटा है..."
वो धक्के मारने लगा। सिद्धार्थ मुंह में लंड डाल रहा था। विक्रम चुचे दबा रहा था। अक्षय मेरी गांड में उंगली डाल रहा था। मैं तीन तरफ से चुद रही थी। फिर पोजीशन बदली। मैं ऊपर थी – रोहन की चूत में लंड, सिद्धार्थ पीछे से गांड में। विक्रम मुंह में लंड डाल रहा था। अक्षय मेरे चुचे चूस रहा था। मैं चिल्ला रही थी –
"आह्ह... सब... फाड़ दो... मुझे रंडी बना दो!"
कमरे में थप-थप की आवाज, सिसकारियां और गंदी बातें गूंज रही थीं।
रात भर चुदाई चली। कभी मैं चारों के लंड चूसती, कभी दो-दो छेदों में लेती। आखिर में सबने बारी-बारी मेरी चूत और गांड में झड़ दिया। गर्म वीर्य मेरे अंदर भर गया। मैं थककर लेट गई। सब हंस रहे थे। रोहन बोला –
"प्रिया... तू कमाल की रंडी है।"
मैं हंसकर बोली –
"अब से हॉस्टल में रोज ऐसा ही होगा।"
उस रात के बाद हम चारों का ग्रुप बन गया। हॉस्टल के कमरे में, छत पर, कैंटीन के पीछे – चुदाई जारी है। कॉलेज की पढ़ाई कम, चूत-लंड का मजा ज्यादा।
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प्रिया
कहानीकार