कॉलेज से लिफ्ट देकर खेत में लड़की की चुदाई Hindi Sex Stories
हाय दोस्तों, मैं राहुल हूं। मैं एक छोटे शहर के कॉलेज में पढ़ता हूं और मेरे पास पुरानी बाइक है। रोज शाम को कॉलेज से घर लौटते समय रास्ता खेतों से होकर जाता है। एक शाम बारिश शुरू हो गई थी। मैं बाइक चला रहा था, भीग रहा था। तभी रास्ते में एक लड़की खड़ी दिखी – साड़ी में, बाल भीगे हुए, साड़ी उसके शरीर से चिपक गई थी। वो हाथ दिखाकर रुकने का इशारा कर रही थी।
मैंने बाइक रोकी। वो पास आई और बोली –
"भैया... बहुत बारिश है... मुझे गांव तक छोड़ देंगे?"
उसका नाम पूजा था। गोरी, मीडियम हाइट, साड़ी भीगकर उसके चुचे और कमर का कर्व साफ दिख रहा था। मैंने कहा –
"चलो, बैठ जाओ।"
वो पीछे बैठ गई। उसके चुचे मेरी पीठ से दब रहे थे, हाथ मेरी कमर पर रख दिए। बाइक चलाई लेकिन बारिश और तेज हो गई। रास्ता खाली था, मैंने एक खेत के बीच में बाइक रोकी – चारों तरफ गन्ने की फसल और बारिश।
वो उतरी और बोली –
"भैया... यहां क्यों रोके?"
मैंने कहा –
"बारिश रुकने दो... भीगकर बीमार हो जाओगे।"
वो मेरी तरफ देख रही थी। साड़ी पूरी भीग चुकी थी, ब्लाउज से चुचे साफ उभरे हुए थे। मेरी नजर उसके शरीर पर टिक गई। वो शरमा कर बोली –
"भैया... आप क्या देख रहे हो?"
मैंने हिम्मत करके कहा –
"पूजा... तुम बहुत सुंदर लग रही हो।"
वो मुस्कुराई और पास आई। मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा। वो आंखें बंद कर ली। मैंने उसे गन्ने के बीच खींच लिया। साड़ी का पल्लू सरकाया। ब्लाउज का हुक खोला। ब्रा में उसके चुचे बाहर आए। मैंने ब्रा उतारी। चुचे बड़े-भरे, निप्पल गुलाबी। मैंने एक चुचा मुंह में लिया और चूसने लगा। वो सिहर गई –
"आह्ह... भैया... धीरे... मजा आ रहा है।"
मैं दूसरे को हाथ से मसलता रहा।
फिर मैं नीचे गया। साड़ी ऊपर की, पेटीकोट सरकाया। पैंटी गीली थी। मैंने पैंटी उतारी। उसकी चूत साफ थी, बारिश का पानी और उसका रस मिला हुआ। मैंने जीभ लगाई। वो कमर उठाकर बोली –
"आह्ह... भैया... चाटो... कितना अच्छा लग रहा है!"
मैं जीभ अंदर डालकर चाटता रहा। क्लिट पर जीभ घुमाता, चूसता। वो मेरे बाल पकड़कर दबा रही थी –
"और जोर से... मेरी चूत चाटो... पूरा रस पी लो!"
वो झड़ गई – पानी मेरे मुंह पर छलक गया।
फिर मैंने पैंट नीचे की। मेरा लंड खड़ा था। वो घुटनों पर बैठ गई और चूसने लगी। जीभ से सुपारे चाटती, गले तक ले जाती। मैं कराह रहा था –
"पूजा... चूस... कितना अच्छा कर रही हो!"
वो बोली –
"भैया... आपका लंड कितना सख्त है... मुझे अंदर चाहिए।"
मैंने उसे घास पर लिटाया। टांगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा। वो बोली –
"डालो भैया... पूरी तरह अपना बना लो!"
एक झटके में पूरा अंदर।
"आआह्ह... कितना मोटा है... फाड़ रहा है!"
मैं धक्के मारने लगा। भच्च-भच्च की आवाज खेत में गूंज रही थी। बारिश में हम दोनों भीग रहे थे। वो चिल्ला रही थी –
"जोर से... फाड़ दो मेरी चूत... और तेज!"
मैंने चुचे दबाए, निप्पल काटे। वो दो-तीन बार झड़ गई।
फिर मैंने उसे पलटा। घुटनों पर लिटाया। गांड ऊपर। मैंने पीछे से लंड चूत में घुसाया। तेज धक्के। वो बोली –
"भैया... आज सब कुछ दो... मेरी गांड भी!"
मैंने धीरे से गांड में लंड रखा। वो दर्द से कराही –
"आह्ह... धीरे... लेकिन रुकना मत!"
मैंने पूरा घुसाया और धक्के मारने लगा। चूत में उंगली डालकर, गांड में लंड से चोद रहा था। वो चिल्ला रही थी –
"हां... दोनों छेद फाड़ो... मुझे अपना बना लो!"
बारिश थम गई। हम थककर घास पर लेट गए। वो मेरे सीने पर सिर रखकर बोली –
"भैया... आज बहुत अच्छा लगा।"
मैंने कहा –
"पूजा... अब रोज लिफ्ट दूंगा... और रोज ऐसा ही होगा।"
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राहुल शर्मा
कहानीकार