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दामाद के साथ सास की गुप्त चुदाई - गर्भवती होने की सच्ची कहानी पार्ट 1 - सास-दामाद अफेयर घरेलू चुदाई Hindi Sex Stories

by रिया15 मार्च 20259 मिनट0 views0 Comments

दोस्तों, मेरा नाम रिया है। उम्र 38 साल, और मैं नोएडा में अपने दो बेडरूम के अपार्टमेंट में रहती हूँ। फिगर 36-30-38, गोरी त्वचा जो अभी भी युवा लड़कियों से मुकाबला करती है। मेरी एक बेटी है, प्रिया, 22 साल की—पतली कमर, मध्यम कद, सुंदर चेहरा। उसकी शादी पिछले साल की, और अब वो खुश है। मेरे पति दस साल पहले चल बसे, तब से प्रिया ही मेरा सहारा थी। प्रिया को मिला एक अच्छा लड़का, राज, 28 साल का—लंबा, मस्कुलर बॉडी, और दिल्ली का रहने वाला। वो प्रिया के ऑफिस में काम करता है। दोनों प्यार में थे, शादी की। शादी के बाद राज घर जमाई बनकर हमारे साथ रहने लगा। अपार्टमेंट मेरा अपना है, सोचा जो मेरा है, वो प्रिया का। दामाद को घर में रखा, तो शायद एक बेटा जैसा मिल जाए।

लेकिन दोस्तों, जैसा सोचा वैसा नहीं हुआ। बेटा नहीं, बल्कि एक ऐसा रिश्ता मिला जो कल्पना से परे था। हाँ, मेरी और दामाद राज की गलती से अब मैं माँ बनने वाली हूँ। प्रिया को अभी पता नहीं। आज अपनी सच्ची कहानी शेयर कर रही हूँ, क्योंकि कई औरतों की स्टोरी पढ़ीं, लगा मुझे भी बोलना चाहिए। ये मेरी हकीकत है, जो शॉक कर सकती है, लेकिन सच है। अब डिटेल में बताती हूँ।

पति के जाने के बाद जिंदगी तन्हाई भरी हो गई। रातें अकेली, खाली बिस्तर, जिस्म की भूख हर पल सताती। प्रिया जवान हुई तो उसकी शादी की, ताकि मैं रिलैक्स हो सकूँ। लेकिन आप जानते हैं, वासना की आग अगर न बुझे तो चैन कहाँ? मेरी चूत की गर्मी रातों को बेचैन करती। अकेले कहानियाँ पढ़ती, उंगली डालती, चूचियाँ मसलती, लेकिन बेकार। मुझे मर्द का लंड चाहिए था, जो चूत की प्यास बुझाए।

प्रिया की शादी के बाद घर में नया माहौल। रातों को उनके कमरे से चुदाई की आवाजें— "आह... उह... राज... जोर से... चोदो..." प्रिया की सिसकारियाँ मेरे कमरे तक। अपार्टमेंट में बाहर न जाए आवाज, लेकिन मेरे कानों में थप-थप और मोअन गूँजते। सुनती तो मेरी चूत में आग लग जाती। एक कमरे में मस्ती, मेरे में सिर्फ तड़प। ये ज्यादा दिन नहीं चल सकता था।

एक रात, करीब 1 बजे, मैं कमरे में थी। बेडशीट के नीचे, पतली नाइटी में, चूत में उंगली डाले सिसकार रही थी। नाइटी जाँघों तक चढ़ी, आँखें बंद, अपनी दुनिया में। तभी राज, प्रिया को चोदकर पानी पीने किचन जा रहा था, मेरे कमरे के पास से गुजरा। उसने मुझे देख लिया। प्रिया थककर सो गई थी। राज चुपके से अंदर आया। मैं घबरा गई, बेडशीट खींच ली।

वो बेड के किनारे बैठा, धीरे बोला, "माँ जी, ये क्या? आप क्यों तड़प रही हैं?" साँसें रुक गईं। चुप रही। फिर बोला, "मैं समझता हूँ। अगर चाहें, तो मदद कर सकता हूँ।" चौंक गई। काँपती आवाज में, "राज, क्या बोल रहे हो? तुम दामाद हो, बेटे जैसे। गलत है।" वो मुस्कुराया, "माँ जी, आप 38 की हैं, खूबसूरत। इतने साल दबाया है। आपके लिए अच्छा नहीं। कल कोई गलत आदमी आया तो? मुझे और प्रिया को दिक्कत।"

बातों में दम था। मैं भीतर चुदना चाहती थी। समाज का डर रोकता था। लेकिन चूत की आग बर्दाश्त से बाहर। सोचा, आज नहीं तो कल किसी से करूँगी। राज घर का, भरोसे का। मन उलझा, लेकिन जिस्म की भूख जीती। उसका हाथ पकड़ा, "दरवाजा बंद करो।" वो बंद करके आया।

साँसें तेज, दिल धड़का। राज करीब आया, आँखों में देखा, होंठ मेरे होंठों पर। काँपते होंठ जवाब देने लगे। उसके बालों में उंगलियाँ फिराईं। बेडशीट हटाई, नाइटी ऊपर सरकाई, चूचियों पर हाथ। चूचियाँ 36D की, गोल, भारी। बोला, "माँ जी, ये तो जवान लड़की की भी बेहतर। मस्त!" शरमाकर, "अब ये तुम्हारे लिए।"

वो ऊपर चढ़ा, हाथ ऊपर ले गया। चूचियाँ तन गईं, निप्पल सख्त। कांख नहीं शेव की, काले बाल। राज ने सूँघा, चाटा। करंट दौड़ा। "आह... राज... उह..." सिसकारियाँ। होंठ सूखे, चूत गीली। सालों बाद ऐसा स्पर्श।

होंठ चूसे, नीचे आया। नाइटी ऊपर, चूचियाँ आजाद। जोर से दबाया, निप्पल काटा। "आह... राज... धीरे... उह... अच्छा लग रहा है..." चूत पानी छोड़ रही। नाइटी उतारी, पैंटी में। पैंटी सरकाई। चूत पर घने बाल, लेकिन वो चाटने लगा। जीभ दाने पर। "आह... राज... और चाटो... उह..." सिसकारियाँ। चूत गीली, जीभ आग लगा रही।

मुझे पलटा, पेट के बल। पीठ पर किस, गांड सहलाई, जीभ चूतड़ों पर। "आह... राज... क्या कर रहे... उह..." मचल रही। गांड फैलाई, दरार में जीभ। पागल हो गई। झटके से पलटी, "बस! अब चोदो!"

पैंट उतारी। लंड मोटा, 7 इंच, फूला। चूत पर रगड़ा। "राज... डालो..." जोरदार धक्का, पूरा अंदर। "आह... हाय..." सालों बाद सुख। धीरे धक्के। "थप-थप" गूँज। गांड उठाकर साथ दिया। "आह... राज... जोर से... फाड़ दो..."

घोड़ी बनाया। पीछे से डाला, जोरदार चुदाई। "आह... उह... राज... गहरा... हाय..." सिसकारियाँ। गांड पर थप्पड़। "रिया माँ जी... टाइट चूत... आह... मजा..." "हाँ राज... चोदो... तेरी है..."

फिर पैर कंधों पर। गहरा धक्का। "आह... राज... मोटा लंड... उह... जोर से..." चूचियाँ मसली, निप्पल काटा, कांख चाटी। बिजली दौड़ी।

गोद में बिठाया, ऊपर-नीचे। चूचियाँ चूसी। "आह... राज... चूसो... उह..." सिसकारियाँ। उस रात दो बार चोदा। पहली चूत में झड़ा, दूसरी चूचियों पर। थककर चूर, लेकिन सुकून मिला।

उसके बाद सिलसिला चला। प्रिया ऑफिस या सोती तो चुदाई। अब मैं दो महीने की गर्भवती, प्रिया भी। सोच में कि बताऊँ या एबॉर्शन? लेकिन राज के लंड की दीवानी हूँ। कोई रोक नहीं सकता, प्रिया भी नहीं।

आपकी राय? प्रिया को बताऊँ या चुप रहूँ? कमेंट में बताओ।

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