देवर के साथ छुपकर मेरी चुदाई – सीमा की गुप्त कहानी Hindi Sex Stories
हाय दोस्तों, मैं सीमा हूं। आज मैं अपनी वो गुप्त और बहुत गंदी कहानी सुना रही हूं जो हनीमून के बाद घर लौटकर शुरू हुई। रोहन के साथ सुहागरात और हनीमून के बाद सब कुछ नॉर्मल लग रहा था, लेकिन घर में रोहन का छोटा भाई – मेरा देवर राहुल – मुझे देखकर अलग ही नजरों से देखता था। राहुल 22 साल का था, बॉडी मजबूत, लंबा-चौड़ा और आंखों में शरारत भरी। मैं समझ गई थी कि उसके मन में मेरे लिए कुछ और चल रहा है।
पहली बार तब हुआ जब सास-ससुर बाजार गए और रोहन ऑफिस चला गया। घर में सिर्फ मैं और राहुल थे।
मैं किचन में खाना बना रही थी – साड़ी पहनी हुई, ब्लाउज टाइट, चुचे ऊपर उठे हुए। राहुल पीछे से आया और अचानक मेरी कमर से पकड़ लिया। उसका खड़ा लंड मेरी गांड पर दब गया। मैं चौंक गई और बोली –
"राहुल... छोड़ो... ये क्या कर रहे हो?"
लेकिन वो नहीं छोड़ा। उसने मेरी साड़ी ऊपर सरकाई, पेटीकोट के नीचे हाथ डाला। मेरी पैंटी पहले से गीली थी। वो बोला –
"भाभी... तुम्हारी चूत कितनी गर्म हो रही है... मुझे पता था तुम तैयार हो।"
मैं रोकना चाहती थी लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था। उसने मुझे सिंक से सटाया और घुटनों पर बैठ गया। मेरी पैंटी नीचे की और जीभ मेरी चूत पर लगा दी।
उसकी जीभ पहले बाहर से चाट रही थी, फिर क्लिट पर घुमा रहा था। मैं सिहर गई –
"आह्ह... राहुल... मत करो... कोई आ जाएगा!"
लेकिन वो रुका नहीं। जीभ अंदर डालकर तेज-तेज चाटने लगा। क्लिट को होंठों में दबाकर चूस रहा था। मेरी चूत से रस बह रहा था, वो सब चाटकर पी रहा था। मैं सिंक पकड़कर कमर उठा रही थी –
"आह्ह... और अंदर... चाटो जोर से... मेरी चूत फाड़ दो जीभ से!"
उसने दो उंगली चूत में डाली और तेज-तेज अंदर-बाहर किया। मैं झड़ गई – पूरा पानी उसके मुंह पर छलक गया। वो सब चाटकर बोला –
"भाभी... तुम्हारा रस कितना मीठा है।"
फिर वो खड़ा हुआ। पैंट नीचे की – उसका लंड बाहर आया, मोटा, काला, सुपारा लाल और चमकदार। वो बोला –
"भाभी... अब चूसो।"
मैं घुटनों पर बैठ गई। लंड हाथ में लिया – गर्म था, सख्त। मैंने जीभ से सुपारे पर चाटा, फिर मुंह में लिया। गले तक ले गई। वो मेरे बाल पकड़कर मुंह में धक्के मारने लगा –
"भाभी... चूस... पूरा मुंह भर... मेरी रंडी बन जा!"
मैं चूसती रही, लार टपक रही थी। टट्टे भी चूसे। वो कराह रहा था –
"आह्ह... भाभी... तेरे मुंह में झड़ जाऊं?"
मैंने कहा –
"नहीं... चूत में झड़ो!"
उसने मुझे काउंटर पर बिठाया। टांगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा और एक झटके में पूरा अंदर।
"आआह्ह... राहुल... कितना मोटा है... फाड़ रहा है मेरी चूत!"
वो तेज धक्के मारने लगा। भच्च-भच्च की आवाज किचन में गूंज रही थी। वो मेरे चुचे दबाता, निप्पल काटता –
"भाभी... तेरी चूत कितनी टाइट है... रोज चोदूंगा!"
मैं चिल्ला रही थी –
"हां राहुल... फाड़ दो... जोर से पेलो... मुझे रंडी बना दो!"
वो तेज हो गया, मैं दो बार झड़ गई। आखिर में उसने चूत में झड़ दिया – गर्म-गर्म वीर्य अंदर भर गया।
रात को सब सो गए। राहुल ने मैसेज किया –
"भाभी... छत पर आओ।"
मैं चुपके से गई। चांदनी में वो मुझे दीवार से सटाकर किस करने लगा। साड़ी उतारी, मैं नंगी हो गई। उसने मेरी गांड दबाई –
"भाभी... आज तेरी गांड फाड़ूंगा।"
मैं बोली –
"धीरे... दर्द होगा!"
उसने वैसलीन लगाई। पहले एक उंगली डाली, फिर दो। मैं कराह रही थी –
"आह्ह... राहुल... धीरे..."
फिर उसने लंड गांड पर रखा। धीरे-धीरे घुसाया। दर्द इतना था कि आंसू आ गए। लेकिन वो रुका नहीं। पूरा घुसाया और धक्के मारने लगा। मैं चिल्लाई –
"आह्ह... फाड़ दो मेरी गांड... जोर से मारो!"
वो गांड पर थप्पड़ मारता –
"ले रंडी... ले पूरा लंड गांड में!"
मैंने चूत में उंगली डाली, खुद को सहलाया। वो तेज-तेज पेलता रहा। मैं झड़ गई – चूत से पानी बहा। वो भी गांड में झड़ गया – गर्म वीर्य भर दिया।
सुबह 5 बजे बालकनी में। रोहन सो रहा था। मैं बालकनी में गई। राहुल आया। मैंने नाइट गाउन पहना। वो गाउन ऊपर किया। मैं घुटनों पर बैठकर लंड चूसने लगी। मुंह में पूरा लिया – जीभ से चाटती, गले तक ले जाती। वो मेरे बाल पकड़कर मुंह में धक्के मार रहा था –
"भाभी... चूस... मेरी रंडी!"
मैंने चूसकर लंड गीला किया।
फिर वो मुझे रेलिंग से सटाया। पीछे से लंड चूत में घुसाया। खड़े-खड़े चोदा। मैं रेलिंग पकड़कर कराह रही थी –
"आह्ह... राहुल... नीचे लोग उठ जाएंगे... लेकिन रुकना मत!"
वो गांड में भी डाला। दोनों छेदों में बारी-बारी पेला। मैं झड़ गई – पानी बालकनी में टपक रहा था। वो चूत में झड़ गया।
अब मैं दोनों भाइयों की चुदाई ले रही हूं – रोहन रात को, राहुल दिन में छुपकर।
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सीमा
कहानीकार