फेसबुक पर मिली प्यासी मैडम की पूरी रात चुदाई – रोहन की हॉट होटल नाइट Hindi Sex Stories
कामवासना की सभी प्यारी चूतों और लौड़ों को आपके दोस्त रोहन मेहरा का प्यार भरा नमस्कार।
मैं मध्य प्रदेश के नीमच का रहने वाला हूँ। लंबाई 5 फुट 6 इंच, रंग सांवला, और मेरा शेर 6 इंच का—कड़क और तैयार।
ये कहानी दो महीने पुरानी है। मैं कामवासना पर स्टोरी पढ़ रहा था, तभी फेसबुक पर एक अननोन मैडम का मैसेज आया। रिप्लाई किया, बात आगे बढ़ी। उन्होंने बताया, "पति नहीं हैं, अकेली रहती हूँ."
उस वक्त मतलब समझ नहीं आया, लेकिन चुप रहा।
फिर रोज चैट होने लगी। एक सुबह "आई लव यू" मैसेज। मैंने इग्नोर किया। दो दिन बाद पूछा, "नाराज हो?" मैंने मजाक में कहा, "प्यार ही करेंगी या कुछ और भी?" वे बोलीं, "जो करना है, कर लेना."
खुलकर बात हुई, अगले दिन मिलने को बोला और फोन काट दिया।
अब मैडम के बारे में बताता हूँ—नाम प्रिया, उम्र 32 साल। मस्त औरत—बड़े-बड़े बूब्स जैसे रसीले आम, पतली कमर, बलखाती गांड पर लंबी चोटी नितंबों को छूती हुई। रसभरे होंठ, देखते ही चूमने का मन। कोई भी देखे, लंड खड़ा हो जाए।
मैं तो जवान मर्द, ऊपर से वे खुद तैयार। दिन भर सोचता रहा—कैसे मिलूँगा, कैसे किस करूँगा, नंगी कैसी लगेंगी। सोच-सोचकर पानी निकल गया।
अगले दिन फोन आया—"चलना है तो आ जाओ!"
खुशी से उछल पड़ा। तैयार होकर गाड़ी लेकर पहुँचा। सामने नीली साड़ी में प्रिया—मैचिंग ब्लाउज, लाल लिपस्टिक, झुमके, खुले बाल। परी जैसी लग रही थीं। गाड़ी में बैठीं तो परफ्यूम की खुशबू फैल गई।
बोलीं, "आज पूरी रात तुम्हारे साथ। कहीं भी चलो।" मैंने कहा, "चलो, जन्नत दिखाता हूँ."
गाड़ी बढ़ाई।
थोड़ी देर बाद उनका हाथ मेरे हाथ पर। फिर झटके से पल्लू गिरा—जालीदार ब्लाउज में बिना ब्रा के दूधिया चूचे साफ दिखे। उनकी नजर मेरी जांघों पर। हाथ मेरे लंड पर। करंट सा लगा। बोला, "इसे आजाद करो!"
जिप खोली, लंड बाहर निकाला, सहलाने लगीं।
"यार, बहुत बड़ा है... मजा आ गया!"
कहकर मुँह में लिया। कार चलाते हुए चूस रही थीं। स्पीड बढ़ाई, मैं सहन नहीं कर पाया। बोला, "ऐसे तो हो जाएगा!" वे बोलीं, "हो जाने दो, बाद में लंबा चलेगा."
गाड़ी धीमी की। लगातार चूसती रहीं।
"आह, होने वाला है!"
बोलीं, "रस पीना है... कई दिनों से प्यासी हूँ." मुँह में भर लिया। तूफानी झटके से सारा पानी उनके मुँह में। वे गटक गईं, बोलीं, "वाउ... इतना रस! पहली बार इतना पीया."
गाल पर किस किया।
मैं बोला, "तुम बहुत मस्त चूसती हो!" वे हँसीं, "तुम्हारा भी कड़क और बड़ा है."
होटल तलाशा—नीमच के हाईवे पर एक अच्छा सा होटल मिला। रूम लिया। वे बोलीं, "टॉयलेट जाना है."
रूम में गईं, दरवाजा खुला। अंदर गईं तो पेटीकोट ऊपर करके मूत रही थीं। झरने जैसा नजारा। मैं घुस गया। शर्मा कर बोलीं, "जाओ!"
लेकिन मैंने गले लगाया, होंठ चूसने लगा। वे भी साथ देने लगीं। बेहताशा किस—जीभ अंदर-बाहर। कपड़े उतारे। ब्लाउज खोला, बूब्स सहलाए। साड़ी उतारी। बिना बालों वाली चूत—रूई जैसी मुलायम। उंगली छुई तो उछलीं। फिर किस करते-करते उंगली डाली, हिलाई। चूत गीली, पानी टपक रहा।
शावर ऑन किया। पानी की बूंदों में नहलाते हुए साबुन लगाया—मैं उनके बूब्स पर, वे मेरे लंड पर। लंड धोया, फिर चूसने लगीं। मजा अलग लेवल।
नंगे बेड पर। वे मुझे पटका, ऊपर चढ़ीं। किस करती रहीं, लंड चूसा। मैं उंगली डालता रहा। फिर टांगें फैलाईं, लंड पर बैठीं। गच्छ की आवाज के साथ पूरा अंदर। धीरे हिलने लगीं। चूचे उछल रहे, आहें। मैंने दबाए, चूसे।
वे बेहाल होकर गिर गईं—ऑर्गेज्म। मैं ऊपर चढ़ा, चूत चाटी। फूल जैसी कोमल, कोई बाल नहीं। जीभ से भगनासा सहलाया। वे सर दबा रही थीं। उंगली अंदर-बाहर। फव्वारा निकला—सफेद पानी जांघों पर।
फिर लंड डाला, धीमे झटके। वे साथ देने लगीं। तेज किया।
"और तेज!" बोलीं। उनका दूसरा पानी। फिर डॉगी—पीछे से, चूचे दबाते हुए। मेरा आने वाला। बोलीं, "मुँह में!"
निकाला, मुँह में झड़ दिया। गटक गईं, चाटकर साफ किया। "बहुत दम है... चूत सूज गई!"
लंबा किस। रात भर अलग-अलग पोजिशन में चुदाई। चिपककर सोए, बीच-बीच में फिर शुरू। सुबह देर से उठे, बाथरूम में घोड़ी बनाकर एक राउंड और।
फिर छोड़ा और घर आ गया। अब फोन पर बात, कभी फोन सेक्स। कई बार और चुदाई की, अगली बार सुनाऊँगा।
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रोहन मेहरा
कहानीकार