हॉस्टल रूम में थ्रीसम चुदाई – मेरी सबसे गंदी रात Hindi Sex Stories
हाय दोस्तों, मैं विकास हूं। कॉलेज के दूसरे साल की बात है। हॉस्टल में मेरा रूममेट था अजय। हम दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन अजय की गर्लफ्रेंड रिया को देखकर मेरे मन में हमेशा कुछ चलता रहता। रिया – गोरी, स्लिम, 34-26-34 का फिगर, लंबे बाल और हमेशा टाइट टॉप-शॉर्ट्स में घूमती। वो अक्सर हमारे रूम में आ जाती, हम तीनों मिलकर पढ़ाई करते या फिल्म देखते।
एक रात अजय ने कहा –
"भाई, रिया आज रात रुक रही है। तू बाहर चला जा?"
मैं हंसकर बोला –
"अरे यार, मैं कहां जाऊं? रूम मेरा भी है।"
फिर मजाक में बोला –
"चल, तीनों मिलकर मजा लें।"
अजय ने हंसकर कहा –
"देखते हैं, रिया को बता दूं।"
रात 11 बजे रिया आई। टाइट टॉप और शॉर्ट्स में, चुचे बाहर झांक रहे थे। हम तीनों बेड पर बैठे। फिल्म लगाई, लेकिन कोई देख नहीं रहा था। अजय ने रिया को किस करना शुरू किया। मैं देखता रहा। रिया ने मुझे देखकर मुस्कुराई और बोली –
"विकास... तू भी आ जा ना।"
मैं चौंक गया। अजय बोला –
"चल भाई, आज थ्रीसम ट्राई करते हैं।"
मैंने हां कर दी। अजय ने रिया का टॉप उतारा। ब्रा में उसके चुचे बाहर आए। मैंने ब्रा खोली – चुचे बड़े-भरे, निप्पल गुलाबी और सख्त। मैंने एक चुचा मुंह में लिया, चूसने लगा। रिया कराह रही थी –
"आह्ह... विकास... चूसो जोर से... दोनों मिलकर चूसो!"
अजय दूसरे चुचे पर टूट पड़ा। हम दोनों उसके चुचे चूसते रहे, निप्पल काटते, दांत गड़ाते। वो सिहर रही थी।
फिर मैं नीचे गया। उसकी शॉर्ट्स उतारी, पैंटी गीली थी। पैंटी उतारी – चूत साफ, गुलाबी, रस से चमक रही। मैंने जीभ लगाई। रिया चीखी –
"आह्ह... विकास... चाटो... अंदर डालो जीभ!"
मैं जीभ अंदर डालकर चाटता रहा। क्लिट पर जीभ घुमाता, चूसता। अजय उसके मुंह में लंड डालकर चुसवा रहा था। रिया दोनों तरफ से मजा ले रही थी – चूत में मेरी जीभ, मुंह में अजय का लंड। वो झड़ गई – पानी मेरे मुंह पर छलक गया।
अब रिया ने दोनों लंड पकड़े। हम दोनों खड़े थे। वो घुटनों पर बैठकर एक-एक करके चूसने लगी। मेरे लंड को मुंह में लिया, जीभ से चाटा, गले तक ले गई। फिर अजय का। वो बोली –
"दोनों लंड कितने स्वादिष्ट हैं... मैं तुम दोनों की रंडी हूं!"
हम दोनों उसके मुंह में बारी-बारी धक्के मारने लगे। लार टपक रही थी।
फिर हमने उसे बेड पर लिटाया। अजय नीचे लेटा, रिया उसके लंड पर चढ़ गई – चूत में लंड अंदर। मैं पीछे से आया। वैसलीन लगाई और लंड गांड पर रखा। रिया बोली –
"विकास... धीरे... दोनों छेदों में पहली बार!"
मैंने धीरे से घुसाया। दर्द से वो चीखी –
"आह्ह... फाड़ रहा है... लेकिन रुकना मत!"
मैंने पूरा घुसाया।
अब रिया बीच में – चूत में अजय का लंड, गांड में मेरा। हम दोनों धक्के मारने लगे। भच्च-भच्च की आवाज रूम में गूंज रही थी। रिया चिल्ला रही थी –
"आह्ह... दोनों साले... फाड़ दो मेरी चूत-गांड... मुझे रंडी बना दो... जोर से पेलो!"
हम तेज हो गए। चुचे हिल रहे थे। मैंने चुचे दबाए, निप्पल काटे। वो बार-बार झड़ रही थी – चूत से पानी बह रहा था।
हमने पोजीशन बदली। रिया घुटनों पर थी। अजय मुंह में लंड डाल रहा था, मैं पीछे से चूत में। फिर बारी-बारी गांड और चूत में। रात भर चुदाई चली। कभी वो ऊपर, दोनों लंड एक साथ चूसती। कभी हम दोनों उसे चोदते। आखिर में अजय ने चूत में झड़ दिया, मैंने गांड में। गर्म वीर्य दोनों छेदों में भर गया।
सुबह तक हम थककर लेटे थे। रिया बोली –
"दोनों भाइयों ने मुझे रंडी बना दिया... लेकिन मजा बहुत आया।"
हम तीनों हंस दिए।
उसके बाद से हॉस्टल में थ्रीसम रोज का हो गया। कैंटीन के पीछे, लाइब्रेरी में, गार्डन में – कभी दोस्तों के रूम में छुपकर।
Related:
कमेंट्स (0)
कमेंट लोड हो रहे हैं...
विकास शर्मा
कहानीकार