सीमा का घर लौटकर चुदाई – हनीमून के बाद घर में छुपकर गंदी मस्ती Hindi Sex Stories
हाय दोस्तों, मैं सीमा फिर से अपनी कहानी का पार्ट 2 सुना रही हूं। हनीमून गोवा में इतना मजा आया कि घर लौटकर भी चुदाई का सिलसिला रुका नहीं – बल्कि और तेज हो गया। घर में सास-ससुर, देवर सब थे, इसलिए हमें छुपकर करना पड़ता था। लेकिन यही रिस्क मजा दोगुना कर देता था।
घर पहुंचते ही पहली रात कमरे में रोहन ने मुझे बिस्तर पर पटक दिया।
बोला –
"सीमा... हनीमून की यादें ताजा हैं, आज फिर तेरी चूत फाड़ूंगा।"
मैंने शरमाकर हां कहा। उसने मेरी साड़ी खींची, ब्लाउज उतारा। चुचे बाहर आए। वो चूसने लगा – निप्पल काटता, दांत गड़ाता। मैं कराह रही थी –
"आह्ह... रोहन... धीरे... आवाज चली जाएगी!"
वो बोला –
"रंडी... चिल्ला... सब सुन लें!"
उसने मेरी पेटीकोट ऊपर की, पैंटी उतारी। चूत गीली थी। वो जीभ लगाकर चाटने लगा। मैं तकिए में मुंह दबाकर मोन कर रही थी –
"और अंदर... चाटो... मेरी चूत तेरी है!"
वो क्लिटोरिस चूसता रहा। मैं झड़ गई – पानी उसके मुंह पर छलक गया।
फिर मैंने उसका लंड पकड़ा। पजामा उतारा। लंड खड़ा था। मैंने मुंह में लिया – जीभ से चाटती, गले तक ले जाती। वो कराह रहा था –
"सीमा... चूस... मेरी रंडी बन जा!"
मैंने टट्टे चूसे, लंड पूरा मुंह में भरा।
वो मुझे डॉगी में लिया। पीछे से लंड चूत में घुसाया। तेज धक्के – भच्च-भच्च। मैं तकिए में मुंह दबाकर चिल्लाई –
"फाड़ दो... जोर से पेलो!"
वो गांड पर थप्पड़ मारता –
"ले रंडी... ले पूरा लंड!"
रात को सब सो गए तो हम छत पर चले गए। चांदनी थी। मैंने साड़ी ऊपर की, रोहन ने पीछे से लंड डाला।
छत की दीवार से सटाकर चोदा। मैं बोली –
"रोहन... छत पर चुद रही हूं... नीचे सास-ससुर सो रहे हैं!"
वो बोला –
"रिस्क मजा है... तेरी चूत और गीली हो गई!"
वो गांड में भी डाला – वैसलीन लगाकर पूरा घुसाया। मैं चिल्लाई –
"आह्ह... गांड फाड़ दो... मुझे रंडी बना दो!"
वो तेज धक्के मारता रहा। दोनों झड़ गए।
अगले दिन किचन में। सास बाहर गई थीं। रोहन आया, मुझे सिंक से सटाया। साड़ी ऊपर की, पैंटी सरकाई। उंगली चूत में डाली। मैं बोली –
"रोहन... कोई आ जाएगा..."
वो बोला –
"चुप रह... चूत चाटता हूं।"
घुटनों पर बैठकर चाटने लगा। मैं सिंक पकड़कर कराह रही थी –
"आह्ह... और जोर से... चाटो!"
वो जीभ अंदर डालता रहा। मैं झड़ गई।
फिर उसने मुझे काउंटर पर बिठाया। लंड निकाला और चूत में घुसाया। खड़े-खड़े चोदा। मैं चिल्लाई –
"फाड़ दो... किचन में चुद रही हूं!"
वो तेज पेलता रहा। आखिर में चूत में झड़ गया।
सुबह-सुबह बालकनी में। सब सो रहे थे। मैंने नाइट गाउन पहना। रोहन आया, गाउन ऊपर किया। लंड निकाला। मैंने घुटनों पर बैठकर चूसा। वो कराह रहा था –
"सीमा... चूस... पूरा मुंह भर!"
मैंने चूसकर लंड गीला किया। फिर वो मुझे बालकनी की रेलिंग से सटाकर पीछे से डाला। बालकनी में चुदाई – नीचे सड़क, ऊपर छत। मैं बोली –
"रोहन... कोई देख लेगा... लेकिन रुकना मत!"
वो गांड में भी डाला। दोनों छेदों में बारी-बारी चोदा।
दिनभर छुप-छुपकर मजा लेते रहे। सास-ससुर के सामने शरमाती हूं, लेकिन रात को रंडी बन जाती हूं। रोहन कहता है –
"सीमा... तू मेरी सबसे गर्म रंडी है।"
मैं कहती हूं –
"रोहन... तेरे लंड के लिए हूं।"
अब घर में हर कोना हमारी चुदाई का गवाह है।
Related:
कमेंट्स (0)
कमेंट लोड हो रहे हैं...
सीमा
कहानीकार