सुहागरात की पहली रात – सीमा की चूत-गांड फाड़ चुदाई पार्ट 1 - देसी हिंदी सेक्स स्टोरी Hindi Sex Stories
हाय दोस्तों, मैं हूं सीमा। आज मैं अपनी सुहागरात की वो पहली रात की पूरी कहानी सुना रही हूं – वो रात जब मैं पहली बार औरत से पूरी रंडी बनी। शादी के दिन मैं लाल जोड़े में इतनी शर्माई हुई थी कि आंखें नीची ही रह गईं। लेकिन दिल में उत्साह था, घबराहट थी और बहुत सारा प्यार।
शादी के बाद घर पहुंचे। कमरा फूलों से सजा था – गुलाब की पंखुड़ियां बिस्तर पर बिछी हुईं, मोमबत्तियां जल रही थीं, अगरबत्ती की खुशबू फैली हुई। पति (जिसका नाम रोहन है) ने दरवाजा बंद किया। मैं बिस्तर के किनारे बैठी थी, दुपट्टा सिर पर, हाथ में कसकर पकड़े। वो मेरे पास आया और धीरे से बोला –
"सीमा... घबराओ मत। आज की रात हमारी है।"
मैंने मुस्कुराकर कहा –
"मैं घबराई नहीं हूं रोहन... बस... पहली बार है सब कुछ। बहुत खुश हूं।"
उसने मेरा दुपट्टा उतारा। मेरे बाल खुले। उसने मेरे गाल पर हाथ फेरा, फिर होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। पहला किस इतना गहरा था कि सांस रुक गई। जीभ अंदर घुसी, मैंने भी जवाब दिया।
उसके हाथ मेरी कमर पर गए, फिर पीठ पर। उसने ब्लाउज के हुक खोले। ब्लाउज खुला, ब्रा में मेरे 36 साइज के चुचे बाहर झांक रहे थे। उसने ब्रा उतारी। चुचे बाहर आए – निप्पल सख्त, गुलाबी।
उसने एक चुचा मुंह में लिया, चूसने लगा। मैं कराह रही थी –
"आह्ह... रोहन... धीरे... कितना मजा आ रहा है।"
वो दूसरे को हाथ से मसलता, निप्पल काटता। मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी। चुचे इतने संवेदनशील थे कि मैं सिहर रही थी।
फिर वो नीचे गया। मेरी लहंगा ऊपर की, पेटीकोट सरकाया। पैंटी गीली हो चुकी थी। उसने पैंटी उतारी। मेरी चूत साफ थी, रस से चमक रही थी। वो घुटनों पर बैठ गया और जीभ लगाई। मैं चीखी –
"आह्ह... रोहन... क्या कर रहे हो... शर्म आ रही है!"
लेकिन टांगें खुद फैल गईं। वो जीभ अंदर डालकर चाटने लगा। मैं उसके सिर को दबा रही थी –
"और अंदर... चाटो जोर से... मेरी चूत तेरी है!"
कुछ मिनट चाटने के बाद मैं झड़ गई – पूरा पानी उसके मुंह पर छलक गया। मैं थर-थर कांप रही थी।
अब उसकी बारी। उसने कुर्ता-पायजामा उतारा। उसका लंड बाहर आया – लंबा, मोटा, नसें फूली हुईं। मैंने देखा तो आंखें फैल गईं –
"रोहन... कितना बड़ा है... डर लग रहा है।"
वो बोला –
"शांत रहो, धीरे-धीरे होगा।"
मैं घुटनों पर आई। पहली बार लंड पकड़ा, हिलाया। फिर मुंह में लिया। जीभ से चाटती, गले तक ले जाती। वो कराह रहा था –
"सीमा... कमाल कर रही हो... चूस जोर से... मेरी रंडी बन जाओ!"
मैंने टट्टे भी चूसे। लंड मुंह में भरकर चूसती रही।
फिर उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया। टांगें फैलाईं। लंड चूत पर रगड़ा। मैं बोली –
"डालो रोहन... मुझे अपना बना लो!"
एक झटके में पूरा अंदर।
"आआह्ह... दर्द हो रहा है... लेकिन रुकना मत!"
वो धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। दर्द कम हुआ, मजा आने लगा। मैं बोली –
"जोर से... फाड़ दो मेरी चूत!"
वो तेज हो गया। भच्च-भच्च की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
पोजीशन बदली – डॉगी स्टाइल। मैं घुटनों पर झुक गई। वो पीछे से चोदा। चुचे हिल रहे थे। उसने गांड पर थप्पड़ मारे –
"ले रंडी... ले पूरा लंड!"
मैं चिल्लाई –
"हां रोहन... मारो... मेरी गांड भी मारो!"
उसने वैसलीन लगाई, पहले उंगली से गांड खोली। फिर लंड रखा। धीरे-धीरे घुसाया। दर्द से मैं रोने लगी लेकिन बोली –
"रुकना मत... पूरा डालो!"
वो पूरा घुसाया और पेलना शुरू। चूत में उंगली डालकर, गांड में लंड से चोद रहा था। मैं झड़ रही थी – बार-बार।
रात भर चुदाई चली। कभी वो ऊपर, कभी मैं ऊपर। कभी 69 में – वो चूत चाटता, मैं लंड चूसती। कभी मैं उसके लंड पर चढ़कर उछलती।
आखिर में उसने चूत में झड़ दिया – गर्म वीर्य भर दिया। मैं भी झड़ गई।
सुबह तक हम थककर लेटे थे। मैं उसके सीने पर सिर रखकर बोली –
"रोहन... ये सुहागरात कभी नहीं भूलूंगी।"
वो बोला –
"सीमा, अब हर रात ऐसी ही होगी।"
उसके बाद से हमारी जिंदगी चुदाई और प्यार से भरी है। हर रात कमरे में फूलों की जगह चुदाई की खुशबू फैलती है। मैं अब पूरी रंडी बन चुकी हूं – लेकिन सिर्फ अपने पति के लिए।
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सीमा
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