ट्रेन के जनरल कोच में पहली चुदाई – अभिषेक की अनजान आंटी के साथ हॉट जर्नी Hindi Sex Stories
दोस्तों, मेरा नाम अभिषेक सिंह है। मैं पश्चिम बंगाल का रहने वाला हूँ। छोटा-मोटा बिजनेस चलाता हूँ, दिन-रात काम में व्यस्त रहता हूँ। सेक्स या लड़कियों के बारे में ज्यादा नहीं सोचता था।
ये कहानी कोविड से कुछ महीने पहले की है। मैं कुछ दिनों के लिए मुंबई अपने मामा के घर गया था। वापसी में टिकट नहीं मिल रहा था – रिजर्वेशन फुल। मजबूरी में जनरल कोच में चढ़ गया। कुली की मदद से मुश्किल से एक सीट मिली। ट्रेन चल पड़ी – कोलकाता मेल जैसी लंबी जर्नी, पटना तक रुक-रुक कर।
ट्रेन में चाय वाला आया, एक चाय ली और बिस्किट खाए। कल्याण स्टेशन पर ट्रेन रुकी। तभी एक आंटी दो बैग लेकर आईं। आसमानी साड़ी-ब्लाउज में, उम्र 40-42 के आसपास। फिगर भरावदार, चेहरा गोरा। बोलीं –
"बेटा, बैग नीचे रख दोगे?"
मैंने हाँ कहा और बैग सीट के नीचे सेट कर दिए।
वे खड़ी रह गईं। दो घंटे बाद मुझे लगा, मदद करनी चाहिए। बोला –
"आंटी, आप बैठ जाइए।"
थोड़ी जगह बनाई, वे मेरे साथ चिपक कर बैठ गईं। पैर सटे हुए। बात शुरू हुई। नाम बताया – राधा। पटना जा रही थीं।
ट्रेन में किन्नर आए। जेब से पैसे निकालते वक्त गलती से हाथ उनकी चूची पर टच हो गया। मुलायम, गर्म स्पर्श। झटका लगा। मेरा लंड पहली बार ऐसे तनने लगा। मैंने 20 का नोट दे दिया।
मैं वर्जिन था – लंड कभी हिलाया नहीं था। लेकिन वो स्पर्श... अजीब सनसनी। रात के 10 बजे आंटी ऊंघने लगीं। उनका सिर मेरे कंधे पर टिका। बदन की महक – परफ्यूम मिली पसीने की। दिल तेज़ धड़का। रात 2 बजे तक नींद नहीं आई। उनकी ब्रा की पट्टी दिखी। झांककर देखा – बड़े दूध। वासना बढ़ी। धीरे से उनकी जांघ छुई। कोई रिएक्शन नहीं। सहलाया, मसला। लंड फुल खड़ा।
फिर कमर छुई। आंटी ने आँखें खोलीं और हल्की मुस्कुराई। मेरी जान निकल गई। उन्होंने साड़ी से कमर ढकी। लेकिन मुस्कान से हिम्मत बढ़ी। हाथ फिर से चूचियों के नीचे ले गया। हथेली से सहलाया। आंटी ने हाथ पकड़ा। डर गया।
धीमी आवाज में पूछा –
"शादी हुई है?"
मैं – नहीं।
"सेक्स किया?"
मैं – नहीं।
उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर एक दूध पर रख दिया। साड़ी से ढक लिया। फुसफुसाईं –
"धीरे-धीरे दबाओ।"
मैंने दबाना शुरू किया। मुलायम, गर्म। लंड पैंट में फड़फड़ा रहा था। आंटी ने मेरे लंड को छुआ। बोलीं –
"बाथरूम चलो, मैं आती हूँ।"
बाथरूम में गया। 10 मिनट बाद वे आईं। गले लगाया। बोलीं –
"पहली बार?"
मैंने हाँ कहा। ब्लाउज खोला, ब्रा से एक दूध निकाला।
"चूसो, जैसे आम चूसते हो!"
मैं चूसने लगा। वे मसल-मसल कर चुसवा रही थीं। आहें भर रही थीं।
मेरा हाथ चूत पर गया। बोलीं –
"चाटोगे?"
हाँ। साड़ी उठाई, पैंटी उतारी। टांगें फैलाईं।
"लो, चाटो!"
चूत पर घने बाल। जीभ डाली – मस्त खुशबू। वे सर दबा रही थीं, गांड हिला रही थीं।
कुछ मिनट बाद लंड निकाला। देखकर घबरा गईं।
"इतना बड़ा?"
मैं – हाँ। बोलीं –
"ब्लू फिल्म नहीं देखी?"
मैं – नहीं। समझ गईं मैं अनाड़ी हूँ। लंड सहलाया। मैंने कहा –
"मुँह में लो!"
मना किया, लेकिन बोलीं –
"पेल दो बस।"
किस किया। वॉशबेसिन पर गांड टिकाई। एक टांग दरवाजे पर। लंड घिसा। वे पकड़कर लगाया। धक्का – फिसला। बोलीं –
"अनाड़ी हो!"
फिर सही से लगाया। धक्का दिया।
"ऊई... कितना मोटा!"
धक्के शुरू। मजा आ रहा था। कमर पकड़कर पेला।
5 मिनट बाद बोलीं –
"पीछे से!"
घोड़ी बनीं। आसानी से अंदर। तेज धक्के। आहें। मेरा आने वाला था। जोर से पेला और चूत में झड़ दिया।
वे बोलीं –
"मोटा और मजबूत लंड है तेरा!"
किस किया, कपड़े सेट किए, बाहर निकलीं।
सीट पर आए। नंबर एक्सचेंज। बोलीं –
"एक बार और!"
मैं – पैंटी? नहीं। नीचे बैठा, साड़ी में हाथ डाला। उंगली अंदर-बाहर। 10 मिनट में पानी निकला। मैं चाटा।
फिर बाथरूम। बोलीं –
"जल्दी डाल!"
मैंने शर्त रखी – लंड चूसो। जिद पर मान गईं। घुटनों पर बैठीं, चूसने लगीं। मजा आया। मैं मुँह में पेला। फिर खड़ी हुईं, लंड डाला। धीरे बोलीं, लेकिन मैं जोर-जोर से। 10 मिनट बाद उनका पानी। मैंने निकाला, चाटा। वे फिर चूसने लगीं। मुँह में झड़ दिया। पी गईं।
सीट पर सो गए।
अब रसभरी चुदाई का शौक लग गया। अगली स्टोरी किसी और आंटी या भाभी की जरूर लिखूँगा।
कैसी लगी स्टोरी? बताना!
अभिषेक सिंह
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