चाची राधिका के साथ अगली रात की चुदाई - रोहन की दीवानगी बढ़ती गई पार्ट 2 - चाची-भतीजे अफेयर गाँव वाली हॉट सीक्वल Hindi Sex Stories
पहली रात के बाद चाची राधिका मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रही थीं। उनकी चूत की गर्मी, वो सिसकारियाँ, लंड चूसने का तरीका—सब कुछ बार-बार याद आता। दिन भर मैं गाँव में घूमता, लेकिन मन उसी कमरे में। चाची भी अब मुझसे अलग तरह से देखतीं—पार्क में बैठकर हल्के से मेरी जाँघ पर हाथ फेर देतीं, मुस्कुरातीं और कान में फुसफुसातीं, "रात को जल्दी आ जाना, आज और मजा लेंगे।"
रात हुई। सब सो गए। मैं चुपके से उनके कमरे में पहुँचा। दरवाजा हल्का खुला था, जैसे इंतजार कर रही हों। अंदर नाइट बल्ब जल रहा था। चाची साड़ी में लेटी थीं, लेकिन साड़ी थोड़ी सरकी हुई—एक पैर बाहर, जाँघ दिख रही थी। मैं अंदर गया, दरवाजा बंद किया। चाची मुस्कुराईं, "आ गया मेरा शरारती भतीजा? आज चाची तेरी पूरी मर्जी मानेगी।"
मैं उनके पास लेट गया। उन्होंने मुझे खींचकर चूमना शुरू किया। होंठ गर्म, जीभ अंदर। मैंने भी जोर से चूमा। उनके हाथ मेरी शर्ट में, छाती सहलाने लगे। मैंने उनकी साड़ी खींची। ब्लाउज के बटन खोले। ब्रा नहीं पहनी थीं। नंगे स्तन सामने। मैंने दोनों को दबाया, निप्पल चूसे। "आह्ह... रोहन... जोर से चूस... दूध जैसा स्वाद है न?" वो सिसकार रही थीं। मैंने एक स्तन चूसते हुए दूसरा दबाया। चाची की साँसें तेज।
फिर चाची ने मुझे पीछे धकेला। मेरी पैंट खोली। लंड बाहर निकाला—पहले से खड़ा। "हाय... आज और सख्त लग रहा है..." उन्होंने लंड पकड़ा, सहलाया। फिर मुँह में लिया। जीभ टॉप पर घुमातीं, गले तक ले जातीं। "ऊम्म... चाची... कितना अच्छा चूसती हो..." मैं सिसक रहा था। वो तेज-तेज चूसने लगीं। मैंने उनके बाल पकड़े, हल्के से मुँह में धक्का दिया। वो गुनगुनाईं, लेकिन चूसती रहीं।
कुछ देर बाद चाची उठीं। साड़ी-पेटीकोट-पैंटी सब उतार दिया। पूरी नंगी। चूत गीली, चमक रही थी। बोलीं, "आज पहले तू चाट। चाची की चूत तेरी है।" मैं घुटनों पर बैठा। चूत पर जीभ फेरी। स्वाद नमकीन-मीठा। भगनासा चूसा। उंगली अंदर डाली। "आआह्ह... रोहन... जीभ अंदर डाल... चाट जोर से..." चाची गांड उठा रही थीं। मैं जीभ अंदर-बाहर करता रहा। चूत से पानी निकलने लगा। मैं सब चाटता रहा।
चाची ने मुझे ऊपर खींचा। बोलीं, "अब चोद... लेकिन आज नई पोजिशन।" उन्होंने मुझे लिटाया। खुद ऊपर चढ़ गईं। लंड पकड़ा, चूत पर रखा। धीरे बैठीं। पूरा लंड अंदर। "आह्ह... कितना गहरा... हाय..." वो ऊपर-नीचे होने लगीं। स्तन उछल रहे थे। मैंने दबाए। वो तेज-तेज हिल रही थीं। "चप-चप" आवाज। "हाँ... रोहन... तेरी चाची को चोद... फाड़ दे..." मैं नीचे से धक्के मार रहा था।
फिर चाची पलटीं। डॉगी स्टाइल। गांड ऊपर। मैंने पीछे से लंड डाला। पूरा अंदर। "आआआह्ह... मार डाला... जोर से..." मैंने कमर पकड़ी, जोरदार धक्के। गांड पर हल्के थप्पड़। "पच-पच" गूँज। चाची तकिए में मुँह दबा रही थीं। "ऊऊह्ह... और तेज... चूत फाड़ दो..." मैंने रफ्तार बढ़ाई। चूत सिकुड़ी। "आह्ह... झड़ रही हूँ..." वो झड़ीं। मैं भी। चूत में झड़ गया। गर्म रस अंदर।
हम दोनों थककर लेटे। चाची ने मेरे लंड को सहलाया। बोलीं, "एक राउंड और? आज चाची तेरी पूरी सेवा करेगी।" मैंने हाँ कहा। इस बार वो घुटनों पर बैठीं, लंड चूसा। फिर मुझे लिटाया, ऊपर चढ़ीं। फिर से चुदाई। इस बार मैंने उनके स्तनों पर झड़ दिया। वो दूध जैसा रस चाट लिया।
सुबह होने से पहले मैं वापस अपने कमरे में चला गया। चाची ने कहा, "कल फिर आना। चाची तेरी दीवानी हो गई है।"
उसके बाद गर्मियों की छुट्टियाँ में हर रात चुदाई। चाची और खुल गईं—कभी पार्क के पीछे, कभी खेत में। मैं उनकी चूत का गुलाम हो गया।
दोस्तों, ये मेरी कहानी का सीक्वल कैसा लगा? राय बताओ।
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रोहन
कहानीकार