मेरी गांड ने पहली बार मोटे लंड का स्वाद चखा - बेस्ट फ्रेंड रॉकी के साथ गे सेक्स की हॉट कहानी पार्ट 1 - गांड चुदाई Hindi Sex Stories
दोस्तो, मेरे छोटे से शहर में कैसे मेरी गांड ने पहली बार एक मोटे लंड का स्वाद चखा, वो सब मैं आपको इस हॉट गे सेक्स स्टोरी में बताऊंगा।
तो चलिए, आप सब अपना-अपना तना हुआ लंड हाथ में पकड़ लो और मेरी रसीली, गुलाबी गांड की कल्पना करते हुए इस उत्तेजक कहानी का मजा लो।
मेरी गांड की प्यास इतनी थी कि हर रात सपनों में लंड घूमते रहते, लेकिन किसका लूं? ये बड़ा सवाल था। लेकिन किस्मत जब साथ दे, तो सब हो जाता है... और मेरी किस्मत में लिखा था मेरे बेस्ट फ्रेंड का गर्म, पल्सिंग लंड।
पहले मैं आपको अपने दोस्त से मिलवाता हूं। उसका नाम रॉकी है। वो दिखने में मेरे जैसा ही स्लिम और सेक्सी है, लेकिन उसकी हाइट थोड़ी ज्यादा, लगभग 6 फुट 2 इंच। बॉडी टाइट, मसल्स हल्के-हल्के, और हां, उसका लंड मेरे से कहीं ज्यादा मोटा और लंबा – लगभग 7 इंच का। गांड भी टाइट लेकिन चिकनी।
हम दोनों कॉलेज में साथ पढ़ते थे, क्लास में साथ बैठते, ब्रेक में घूमते, और शाम को शहर की गलियों में मटरगश्ती करते। सेक्स की बातें तो रोज होतीं – लड़कियों को पटाने से लेकर पॉर्न की डिटेल्स तक। हमारी दोस्ती इतनी गहरी थी कि एक बार हमने एक ही लड़की पर ट्राई किया, लेकिन वो फेल हो गया।
एक दिन क्लास में हम दोनों बेंच के नीचे छिपकर मुठ मार रहे थे। दिल की धड़कन तेज, लंड गर्म, और क्लास का शोर हमें कवर कर रहा था। कुछ लड़के शक कर रहे थे, लेकिन टीचर को पता नहीं चला।
शाम को हम सेक्स की बातें कर रहे थे। रॉकी ने पूछा,
"तूने कभी किसी की चूत या गांड मारी है?"
मैंने कहा,
"नहीं, तूने?"
उसने मुस्कुराते हुए बताया,
"मेरे मोहल्ले में एक लड़का है, जिसे मेरे कजिन्स ने कई बार चोदा। वो इतना फ्लेक्सिबल है कि अपना लंड खुद मुंह में ले लेता है।"
उसकी बात सुनकर मेरी गांड में खुजली सी होने लगी, गर्मी चढ़ गई। मैंने उसे अपनी पहली चुदाई बताई – कैसे मेरे चचेरे भाई ने मुझे गांव के खेत में पेला था, कई बार। लेकिन हाल की चुदाई, जो दो हफ्ते पहले हुई थी, वो नहीं बताई।
रॉकी सुनते-सुनते उत्तेजित हो गया, उसने मेरी गांड पर हाथ फेरा। उसका स्पर्श जैसे करंट का झटका – मेरी बॉडी में सिहरन दौड़ गई। लेकिन मैंने कंट्रोल किया। बातें करते-करते शाम हो गई, हम घर चले गए।
अगला दिन कॉलेज के बाद हम खेलने गए, लेकिन रॉकी का मूड नहीं था। वो मुझे कॉलेज की छत पर ले गया, जहां से शहर का नजारा दिखता था। वहां बैठकर सेक्स टॉक शुरू। उसने पूछा,
"तेरी गांड में जब पहली बार लंड गया, कितना दर्द हुआ? खून आया?"
मैंने बताया,
"पहली बार छोटा था, ज्यादा दर्द नहीं।"
वो बोला,
"मेरा भी ज्यादा बड़ा नहीं, ट्राई करूं?"
मेरा मन तो खुशी से नाच उठा, लेकिन बदनामी का डर था। मैंने मना किया, लेकिन वो मानता नहीं। आखिर उसने कहा,
"पहले मैं तेरी गांड मारूं, फिर तू मेरी।"
ये सुनकर मैं राजी हो गया – विश्वास हो गया कि वो किसी को नहीं बताएगा।
रॉकी ने मुझे छत की एक कोने में ले जाकर किस करना शुरू कर दिया। उसके होंठ गर्म, जीभ मेरे मुंह में घूम रही, जैसे मीठा जहर। मैं भी जोश में आ गया, उसके लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगा।
वो मेरी पैंट नीचे कर घोड़ी बना दिया, गांड में थूक लगाकर उंगली डाली। उंगली घूमती हुई अंदर-बाहर, मुझे स्वर्ग का मजा आ रहा था। फिर उसने अपना लंड निकाला – मोटा, नसों वाला, टॉप गुलाबी। थूक लगाकर मेरी गांड पर सेट किया। जैसे ही टॉप अंदर गया, मैं सिसकार उठा – दर्द मीठा था।
लेकिन तभी किसी के कदमों की आवाज आई। हमने जल्दी कपड़े ठीक किए, देखा तो मेरा पड़ोसी था। प्रोग्राम कैंसल, हम घर चले गए।
पूरी रात नींद नहीं आई, लंड का ख्याल सताता रहा। गांड की प्यास बुझाने के लिए मैंने घर का स्क्रूड्राइवर उठाया। मुंह में चूसकर गीला किया, फिर गांड में डाला। हैंडल गोल, रफ – अंदर-बाहर करते हुए फच-फच की आवाज, मजा दोगुना।
आधे घंटे बाद गांड में ही रखकर सो गया। सुबह निकाला, साफ किया। अब ये स्टोरी लिखते हुए भी स्क्रूड्राइवर गांड में है, टाइपिंग के साथ हल्के झटके दे रहा हूं।
अगले दिन कॉलेज में हम जगह ढूंढते रहे। शाम को खेलने के बहाने मिले। रॉकी ने कहा,
"जगह मिल गई – कॉलेज के पीछे वाली पुरानी बिल्डिंग में।"
लेकिन मैं बोला,
"अभी खेलते हैं, सब जाएं तब।"
दो घंटे बाद अंधेरा होने से पहले सब चले गए। हमने छत चेक की, फिर रॉकी मुझे पुरानी बिल्डिंग के एक कमरे में ले गया – जहां पुराना जनरेटर रखा था, अंधेरा लेकिन प्राइवेट। दरवाजा टूटा था, हम अंदर घुसे।
वहां गंदगी थी, लेकिन जोश में हमने कपड़े उतारे। मैंने उसका लंड मुंह में लिया – नमकीन स्वाद, गर्म, मैं चूसता रहा जैसे आइसक्रीम। वो बड़ा होता गया, झटके मारने लगा।
फिर उसने मुझे दीवार से सटाकर घुमा दिया, गांड पर थूक लगाया, लंड सेट किया। बोला,
"ढीला छोड़ बॉडी।"
मैंने दांत भींचे, वो झटका मारा – पूरा लंड अंदर, दर्द से आंखों में आंसू, लेकिन मजा भी। वो पेलने लगा, धीरे-धीरे तेज। गांड में गर्मी, फच-फच आवाज, उसकी गंध – पसीने और सेक्स की।
मैं आहें भर रहा था,
"और तेज, रॉकी!"
वो बोला,
"तेरी गांड कितनी टाइट है, मिल्की!"
झटके तेज, आखिर वो झड़ गया – गर्म माल गांड में बौछार, मैं महसूस कर रहा था हर ड्रॉप। फिर मेरी बारी – मैंने उसकी गांड पेली, वो सिसकारा, लेकिन मजा लिया। 5 मिनट में मैं भी झड़ गया।
उस दिन से हमारा खेल शुरू – कॉलेज में, शहर की नदी किनारे झाड़ियों में, उसके घर, मेरे घर। एक बार नदी में पानी में सेक्स किया – डॉगी स्टाइल, पानी की ठंडक, लंड की गर्मी, अलग मजा। तीन साल चला ये सिलसिला, अनगिनत बार। जगहें बदलीं – जंगल, कार में, यहां तक कि एक पार्टी में बाथरूम।
स्पाइसी मोमेंट्स: एक बार हमारा दोस्त विक्की ने हमें पकड़ा, मेरे घर पर। वो बोला,
"मैं भी जॉइन करूं?"
हमने थ्रीसम किया – मैं बीच में, दोनों तरफ से पेला गया। विक्की का लंड पतला लेकिन लंबा, रॉकी का मोटा – डबल पेनिट्रेशन ट्राई किया, दर्द और प्लेजर का कॉकटेल। गांड से माल टपकता रहा, हम तीनों हंसते-हंसते झड़े। वो अलग स्टोरी है, अगर कमेंट्स अच्छे मिले तो लिखूंगा।
तब तक, आप सबके लंड पर मेरी गांड का गर्म किस।
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अनाम
कहानीकार