प्रिया आंटी के साथ लॉन्ग ड्राइव – कार में चुदाई की रात
बात उस वक्त की है जब मेरी 12वीं की एग्जाम्स खत्म हो चुकी थीं, और घरवाले अभी लौटे नहीं थे। प्रिया आंटी और मैं हर रात चुदाई के नए-नए तरीके आजमा रहे थे। आंटी की वासना की कोई सीमा नहीं थी – वो हमेशा कहतीं,
"राहुल, जिंदगी में रिस्क लेना चाहिए, तभी मजा आता है।"
एक शाम आंटी ने मुझे फोन किया,
"राहुल, आज रात तैयार रहना। हम लॉन्ग ड्राइव पर जा रहे हैं।"
मैं एक्साइटेड हो गया, लेकिन सोचा कि बस घूमना-फिरना होगा। शाम को आंटी अपनी कार लेकर आईं – एक सिल्वर कलर की SUV, जो अंकल की थी। आंटी ड्राइवर सीट पर बैठीं, मैं पास वाली सीट पर। वो एक टाइट जींस और टॉप में थीं, जिसमें उनके बूब्स उभरे हुए लग रहे थे, और गांड जींस में फंसी हुई मटक रही थी।
हम निकले शहर से बाहर, हाईवे की तरफ। रात के 9 बज रहे थे, हल्की ठंडी हवा चल रही थी, और रोड पर ट्रैफिक कम था। आंटी ड्राइव कर रही थीं, और मैं उनकी तरफ देख रहा था।
बोलीं,
"क्या देख रहा है साले? तेरी आंखों में वासना साफ दिख रही है।"
मैं हंसा और बोला,
"आंटी, तुम्हारी गांड जींस में इतनी हॉट लग रही है कि मन कर रहा है अभी छू लूं।"
आंटी मुस्कुराईं और बोलीं,
"रुक, अभी मजा आएगा।"
हमने कुछ देर बातें की – आंटी अपनी बैकस्टोरी के बारे में बता रही थीं, कैसे कॉलेज में विक्रम ने उन्हें चोदने की कोशिश की थी, और कैसे वो अब हर मर्द को अपना गुलाम बनाती हैं। सुनकर मेरा लंड पैंट में तनने लगा।
करीब आधा घंटा ड्राइव करने के बाद आंटी ने कार एक साइड रोड पर मोड़ी, जहां जंगल जैसा एरिया था – डार्क, सुनसान, और कोई गाड़ी नहीं। कार रोकी और बोलीं,
"राहुल, पीछे वाली सीट पर चल।"
मैं समझ गया कि खेल शुरू होने वाला है। हम पीछे शिफ्ट हुए, सीट्स फोल्ड कीं ताकि स्पेस बने। आंटी ने मुझे किस किया – गहरा, जीभ से जीभ मिलाकर। उनके होंठ इतने नरम थे कि मैं पागल हो गया। मैंने उनके टॉप में हाथ डाला, ब्रा के ऊपर से बूब्स दबाए। आंटी सिसकारीं,
"उफ्फ राहुल... दबा जोर से।"
मैंने टॉप उतारा, ब्रा खोली – उनके तरबूज जैसे बूब्स बाहर आ गए, निप्पल कड़े हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया, चूसा, दूसरे को मसला। आंटी के मुंह से आंहें निकलने लगीं,
"चूस साले... काट ले।"
फिर आंटी ने मेरी पैंट खोली, लंड बाहर निकाला। वो देखकर बोलीं,
"वाह, इतना कड़क। आज इसे मेरी चूत में डाल।"
लेकिन पहले वो नीचे झुकीं और लंड मुंह में ले लिया। चूसने लगीं – ऊपर से नीचे, जीभ से चाटतीं, अंडों को मसलतीं। मैं उनके बाल पकड़कर मुंह में धक्के देने लगा,
"आंटी उफ्फ... गले तक ले लो।"
आंटी ग्लक-ग्लक की आवाज निकाल रही थीं, सारा लार लंड पर लग गया। कुछ देर बाद मैंने उन्हें रोका, वरना पानी निकल जाता। अब मैंने आंटी की जींस उतारी – अंदर लाल पैंटी थी, जो गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी साइड की, चूत पर जीभ लगाई। आंटी की चूत गुलाबी, रस से भरी – मैं चाटने लगा, जीभ अंदर डाली, क्लिट को चूसा। आंटी चिल्लाईं,
"आंह राहुल... चाट साले, मेरी चूत तेरी है।"
मैंने दो उंगलियां डालीं, अंदर-बाहर की, साथ में जीभ से चाटा। आंटी का पानी निकल गया – नमकीन, मैं सारा पी गया।
अब आंटी बोलीं,
"चोद मुझे अब।"
मैंने उन्हें सीट पर लेटाया, टांगे फैलाईं, लंड चूत पर रगड़ा। धक्का मारा – पूरा लंड अंदर। आंटी चिल्लाईं,
"आंह मादरचोद... इतना मोटा।"
मैं धक्के मारने लगा – जोर-जोर से, कार हिल रही थी। आंटी नीचे से गांड उठाकर साथ दे रही थीं,
"फाड़ दे साले... मेरी चूत का भोसड़ा बना दे।"
मैं उनके बूब्स पकड़कर चोदता रहा, निप्पल काटता। दस मिनट बाद आंटी झड़ गईं, चूत से फुहार निकली। मैंने स्पीड बढ़ाई, मेरा पानी निकला – सारा चूत में गिरा दिया। हम हांफते हुए लेटे रहे, लेकिन आंटी की भूख कहां खत्म होने वाली थी।
कुछ देर बाद आंटी बोलीं,
"अब ड्राइव करते हुए मजा लें।"
हम वापस फ्रंट सीट पर आए। आंटी ड्राइव करने लगीं, लेकिन जींस नीचे सरका ली।
बोलीं,
"राहुल, सीट नीचे कर और चूत चाट।"
मैं पैसेंजर सीट नीचे की, सिर आंटी की गोद में डाला। चूत खुली हुई थी, मैं जीभ लगाने लगा। कार चल रही थी, स्पीड 60-70, और मैं चूत चाट रहा था। आंटी एक हाथ से स्टेयरिंग पकड़े, दूसरे से मेरा सिर दबा रही थीं,
"चाट साले... मीठी चॉकलेट डालकर चाट।"
उन्होंने डैशबोर्ड से चॉकलेट निकाली, चूत पर टपकाई। मैं चाटता रहा, मीठा-नमकीन स्वाद। रोड पर ट्रक गुजरते, लाइट पड़ती, लेकिन आंटी नहीं रुकीं।
"रिस्क है न, मजा आ रहा है?"
बोलीं। मैं जीभ से चोदता रहा, आंटी का पानी फिर निकला – मुंह में।
फिर आंटी ने कार साइड में रोकी, बोलीं,
"अब तू ड्राइव कर, मैं तेरे लंड पर बैठूंगी।"
मैं ड्राइवर सीट पर आया, लंड बाहर निकाला। आंटी मेरी गोद में बैठीं, चूत में लंड घुसा लिया। कार स्टार्ट की, ड्राइव करने लगा। आंटी उछल-उछलकर चुदवा रही थीं,
"चला साले... स्पीड बढ़ा।"
मैं गियर चेंज करता, साथ में धक्के मारता। आंटी के बूब्स मेरे चेहरे पर, मैं चूसता। रोड पर हॉर्न बजते, लेकिन हम पागल। एक बार पुलिस चेकपोस्ट आया, आंटी ने साड़ी ओढ़ ली, लेकिन नीचे चुदाई जारी। पुलिस ने रोका, पूछा,
"कहां जा रहे हो?"
आंटी बोलीं,
"घर।"
मैं डर गया, लेकिन आंटी ने लंड दबाया,
"चुप रह।"
पुलिस जाने दी, हम हंस पड़े। फिर स्पीड बढ़ाई, आंटी चिल्लाईं,
"फाड़ दे... आंह।"
हम एक सुनसान स्पॉट पर रुके, कार से बाहर निकले। रात का अंधेरा, सितारे चमक रहे। आंटी ने बोलीं,
"अब बाहर चुदाई।"
मैंने उन्हें कार के बोनट पर झुकाया, पीछे से लंड घुसाया – डॉगी स्टाइल। गांड पकड़कर धक्के मारे, आंटी चिल्ला रही थीं,
"जोर से साले... कोई सुन लेगा तो मजा आएगा।"
मैंने स्पैंक किया, गांड लाल कर दी। फिर घुमाया, मिशनरी में चोदा – टांगे कंधों पर। आंटी का पानी फुहार मारकर निकला, मेरी शर्ट गीली। मेरा पानी निकला, सारा बूब्स पर गिरा। आंटी ने उंगली से चाटा,
"तेरी क्रीम मस्त है।"
लेकिन रुकना नहीं था। आंटी बोलीं,
"अब गांड मार।"
मैंने लंड पर थूक लगाया, गांड के छेद पर रगड़ा। धक्का मारा – टाइट थी, आंटी चीखी,
"आंह भोसड़ी के... धीरे।"
मैंने पूरा घुसा, धक्के मारे। कार के खिलाफ ठक-ठक की आवाज। आंटी बोलीं,
"चोद साले... तेरे अंकल कभी बाहर नहीं करते।"
मैंने स्पीड बढ़ाई, गांड सुजा दी। पानी निकला, सारा गांड में। हम थककर कार में लेटे, आंटी मेरे सीने पर।
बोलीं,
"राहुल, ये रात याद रहेगी।"
अगली सुबह हम घर लौटे, लेकिन वो रात की यादें आज भी गर्म करती हैं।
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राहुल
कहानीकार