ससुर का अपना राज - घर में छुपा ससुर का गुप्त अफेयर और बड़ा खुलासा पार्ट 6 - ससुर का सीक्रेट देवर-भाभी अफेयर Hindi Sex Stories
दोस्तों, पिछली स्टोरी में राज के पापा (ससुर जी) ने हमें चुदाई करते पकड़ लिया था, लेकिन उन्होंने सब स्वीकार कर लिया। वो कुछ दिन हमारे साथ रुके, बच्चों को देखा, और फैमिली को मजबूत बनाया। लेकिन एक शाम सब कुछ बदल गया—ससुर जी का अपना राज खुल गया।
ससुर जी पुणे से थे, लेकिन दिल्ली में रुककर घर का माहौल देख रहे थे। एक रात डिनर के बाद हम सब लिविंग रूम में बैठे थे। बच्चे सो चुके थे। ससुर जी बोले, "रिया बहू... राज... प्रिया... मैंने तुम्हारे राज को स्वीकार किया, लेकिन मेरा भी एक राज है। अब समय आ गया है बताने का।" हम तीनों चौंक गए। "क्या राज, पापा?" प्रिया ने पूछा।
ससुर जी ने गहरी साँस ली। "ये बात 30 साल पुरानी है। मैं जवान था, शादी हो चुकी थी। लेकिन मेरी भाभी—तुम्हारी बुआ जी—के साथ मेरा रिश्ता बन गया। वो विधवा थीं, घर में रहती थीं। एक रात मैंने उन्हें तड़पते देखा, जैसे रिया बहू को राज ने देखा। मैंने मदद की... और फिर सिलसिला चला। हमारी चुदाई कई साल चली। तुम्हारी माँ को कभी पता नहीं चला। लेकिन वो बच्चा... जो मेरी भाभी ने जन्म दिया, वो मेरा था।"
हम सब स्तब्ध। राज बोला, "पापा... आप भी...?" ससुर जी ने सिर हिलाया। "हाँ बेटा। मैंने भी वही गलती की जो तुमने की। भाभी की उम्र 35 की थी, मैं 25 का। रातें चोरी-छिपे। उनकी चूत की आग बुझाई, लेकिन बच्चा हो गया। हमने सब छुपाया। अब वो बच्चा बड़ा हो गया, अपना घर बसा लिया।"
मैंने पूछा, "ससुर जी... फिर आपने हमें क्यों स्वीकार किया?" वो मुस्कुराए। "क्योंकि मैं जानता हूँ ये आग क्या है। मैं भी गुजरा हूँ। अब फैमिली में कोई राज नहीं।" प्रिया रो पड़ी, "पापा... आप अकेले तड़पते रहे?" ससुर जी बोले, "अब नहीं। अब मैं भी तुम्हारे साथ हूँ।"
उस रात ससुर जी ने पूरी कहानी सुनाई। कैसे भाभी के साथ पहली बार—रात को किचन में, भाभी चाय बना रही थीं। ससुर जी पीछे से आए, कमर पकड़ी। भाभी की साड़ी ऊपर की, चूत में लंड डाला। "आह... देवर जी... धीरे... उह..." भाभी सिसकार रही थीं। फिर रात-रात भर चुदाई। भाभी घोड़ी बनीं, ससुर जी पीछे से। बच्चा हुआ, लेकिन सब छुपाया।
अब घर में सब खुले। ससुर जी बोले, "अब मैं भी फैमिली का हिस्सा हूँ।" अगले दिन ससुर जी ने कहा, "रिया बहू... अगर तुम चाहो, तो मैं भी..." लेकिन मैंने मना किया। "नहीं ससुर जी... राज काफी है।" लेकिन प्रिया ने कहा, "पापा... अगर माँ चाहें, तो..." सब हँसे। लेकिन अब कोई चुदाई नहीं—सिर्फ प्यार और देखभाल। ससुर जी अब बच्चों के दादाजी बनकर खुश हैं।
फैमिली अब और मजबूत। ससुर जी का राज खुलने से सब करीब आए। दोस्तों, क्या ससुर जी का राज सही था? क्या फैमिली ऐसे राज छुपाने चाहिए? बताओ।
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रिया
कहानीकार